RANCHI: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रवर्तन निदेशालय के हलफनामे का हवाला देते हुए राज्य सरकार की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जहां राज्य की सीआईडी ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की, वहीं ईडी ने 500 करोड़ रुपये के बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है.
भ्रष्टाचार को बचाने का कवच बनीं राज्य की एजेंसियां
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बोकारो वन भूमि घोटाला कोई साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध है. उन्होंने सीआईडी और ईडी की कार्यशैली के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि महीनों की जांच के बाद सीआईडी केवल 3-4 करोड़ रुपये के लेनदेन तक ही सीमित रही. वहीं बेहद कम समय में ईडी ने शेल कंपनियों और बिचौलियों के पूरे नेटवर्क को उजागर कर 500 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा.
रामेश्वर उरांव के बयान ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव के पुराने बयान को आधार बनाते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने याद दिलाया कि स्वयं उरांव ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि जिन मामलों को सरकार लटकाना या भटकाना चाहती है, उन्हें अक्सर एसीबी या सीआईडी के हवाले कर दिया जाता है. बोकारो घोटाले में यह बात सौ फीसदी सच साबित हो रही है.
सत्ता के संरक्षण पर बड़ा सवाल
प्रतुल शाहदेव ने जांच के दायरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने बड़े घोटाले में केवल अंचल अधिकारी जैसे निचले स्तर के अधिकारियों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि बिना उच्च अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर वन भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त संभव नहीं है.
