Ranchi: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में चल रहे श्रमिक आंदोलनों के प्रति सरकारी रवैये पर निशाना साधा है. भाकपा के झारखंड प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक और एटक महासचिव अशोक यादव ने एक संयुक्त प्रेस बयान जारी कहा कि कि सरकार को लाठी और गिरफ्तारी के दम पर मजदूरों की आवाज कुचलने के बजाय उनकी जायज मांगों को पूरा करना चाहिए. भाकपा नेताओं ने नोएडा और फरीदाबाद में मजदूरों पर हुए पुलिसिया एक्शन की निंदा की है.
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क्या हैं मांगें?
न्यूनतम वेतन और कार्य अवधि: मजदूरों की मांग है कि उन्हें सम्मानजनक न्यूनतम वेतन दिया जाए और काम के घंटे 8 तय किए जाएं.
लेबर कोड का विरोध: अशोक यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 4 नए लेबर कोड पूरी तरह पूंजीपतियों के हित में हैं और मजदूरों के अधिकारों का हनन करते हैं. इन्हें तत्काल रद्द किया जाना चाहिए.
पुलिसिया दमन की निंदा: नेताओं ने कहा कि पुलिस गांवों में छापेमारी कर रही है, मजदूरों को प्रताड़ित कर रही है और नेताओं को गिरफ्तार कर आंदोलन को ‘नेतृत्वविहीन’ करने की साजिश रची जा रही है.
अमानवीय हालात: आरोप लगाया गया कि मजदूर आज भी पिछली शताब्दी जैसे बदतर हालात में रहने को मजबूर हैं. पीएफ कटौती में धांधली, ओवरटाइम के नाम पर ठगी और वेतन के टुकड़ों में भुगतान ने उनके आक्रोश को देशव्यापी बना दिया है.
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भाकपा की चेतावनी
महेंद्र पाठक ने कहा कि भाकपा मजदूरों की मांगों के साथ पूरी ताकत से खड़ी है. उन्होंने मांग की कि गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिक नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाए. सरकार को साजिश के आरोप लगाने के बजाय अपनी श्रमिक विरोधी नीतियों पर आत्ममंथन करना चाहिए. भय और आतंक पैदा करने वाली ये कार्यवाहियां बेहद शर्मनाक और अदूरदर्शी हैं. भाकपा और एटक ने अंत में सरकार से मांग की है कि वह श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर तत्काल बातचीत शुरू करे, अन्यथा यह आक्रोश और अधिक व्यापक रूप लेगा.
