Ranchi: राज्य के सभी कारा (जेलों) में प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य कारा लिपिक-सह-कम्प्यूटर संचालक संवर्ग नियमावली, 2025 लागू कर दिया गया है. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के इस प्रस्ताव को सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है. इसके जारी होने के बाद अब कारा विभाग ने लिपिक की भर्ती प्रक्रिया सुचारू रूप से हो पाएगी. नियमावली के अनुसार लिपिक वर्गीय पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों को कंप्यूटर विषय का ज्ञान होना अनिवार्य होगा. यह नई नियमावली राज्य की सभी केंद्रीय काराओं, मंडल काराओं, ओपेन जेलों और बोर्स्टल स्कूलों में तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.
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सीधी भर्ती और प्रोन्नति से पदों को भरने की प्रक्रिया की गई स्पष्ट
नियमावली के तहत लिपिक वर्गीय पदों पर बहाली प्रक्रिया संवर्ग को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है. पहला निम्न वर्गीय लिपिक-सह-कम्प्यूटर संचालक (मूल कोटि) समूह है, जिसके 100% नियुक्तियां सीधी भर्ती के होंगी. वही, उच्च वर्गीय लिपिक पदों को 100% प्रोन्नति से भरा जाएगा. कारागार लिपिक के कुल लिपिक बल का 60 % निम्न वर्गीय लिपिक के होंगे और शेष 40 % पद प्रोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे.
प्रशिक्षण और विभागीय परीक्षा
नियुक्ति के बाद कर्मियों को छह महीने का मूलभूत प्रशिक्षण कारा प्रशिक्षण संस्थान, हजारीबाग’ में लेना होगा.
सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यताएं भी की गई है तय
लिपिक के सीधी भर्ती की प्रक्रिया का जिम्मा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को दिया गया है. आयोग द्वारा आयोजित होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को मान्यता प्राप्त संस्थान से न्यूनतम इंटरमीडिएट (10+2) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा. इसके अलावा कंप्यूटर एप्लीकेशन में कम से कम छह माह का डिप्लोमा और माइक्रोसॉफ्ट (एमएस ऑफिस) का ज्ञान होना चाहिए. कंप्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग में 25 शब्द प्रति मिनट की गति अनिवार्य है. अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है.
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उच्च वर्गीय लिपिक के पदों पर प्रोन्नति के लिए बनेगी कमिटी, जेल आईजी होगे अध्यक्ष
उच्च वर्गीय लिपिक के पदों पर 100% प्रोन्नति वरीयता-सह-योग्यता’ के आधार पर दी जाएगी. इसके लिए एक उच्च स्तरीय ‘विभागीय प्रोन्नति समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं कारा महानिरीक्षक (जेल आईजी) करेंगे. नई नियमावली न केवल रिक्त पदों को भरने का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि जेलों के प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ भी बनाएगी.
