Ranchi: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अब नई धार मिलने वाली है. राज्य के नवनियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पदभार ग्रहण कर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं. पद संभालते ही उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके रडार पर सबसे पहले 3000 लंबित मामले होंगे.
पहले दिन ही किया निरीक्षण
राजभवन में शपथ लेने के सीधे बाद जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे. उन्होंने न केवल पदभार ग्रहण किया, बल्कि तत्काल कार्यप्रणाली को समझने के लिए कार्यालय का बारीकी से निरीक्षण भी किया. उन्होंने कोर्ट रूम से लेकर कार्यालय कक्षों का जायजा लिया. उन्होंने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले लोकायुक्त एक्ट की कॉपी मांगी.
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भ्रष्टाचार पर वार, त्वरित न्याय का आधार
मीडिया से रूबरू होते हुए नए लोकायुक्त ने अपनी कार्ययोजना साझा की. उन्होंने कहा आज मेरा पहला दिन है और मैं व्यवस्थाओं को समझ रहा हूं. राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े लगभग तीन हजार मामले लंबित हैं. मेरी प्राथमिकता इन पुराने मामलों की सुनवाई कर इनका तेजी से निपटारा करना होगा. जनता को न्याय मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए.
न्यायिक सेवा का लंबा अनुभव
जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता को न्यायिक जगत में त्वरित न्याय देने वाले न्यायाधीश के रूप में जाना जाता है. उनके पास अनुभवों की एक लंबी फेहरिस्त है. 1997 में न्यायिक सेवा में प्रवेश (संयुक्त बिहार में एडीजे के रूप में सेवा). बहुचर्चित चारा घोटाला मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका. 2013 से 2021 तक झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया. वे झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष और आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन रहे.
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खाली पड़े आवास और कार्यालय में लौटी रौनक
लंबे समय से लोकायुक्त का पद रिक्त होने के कारण कार्यालय में सन्नाटा पसरा था, जो जस्टिस गुप्ता के आने से एक बार फिर गुलजार हो गया है. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ उस सरकारी आवास का भी निरीक्षण किया जो लंबे समय से खाली पड़ा था. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवास के रख-रखाव को लेकर आवश्यक निर्देश दिए.
