Saraikela: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के हारूडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में शुक्रवार को Pandit Raghunath Murmu की 122वीं जयंती और ओलचिकी लिपि शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन Olchiki Ol Itun Asra और Satya Narayan Socio Economic and Research Center के संयुक्त तत्वावधान में हुआ.
पारंपरिक तरीके से हुआ अतिथियों का स्वागत
समारोह की शुरुआत नायके बाबा सुशील बेसरा द्वारा पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर पूजा-अर्चना और माल्यार्पण के साथ की गई. इसके बाद आदिवासी परंपरा के अनुसार अतिथियों का स्वागत गाजे-बाजे, पारंपरिक नृत्य, पुष्प गुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पारगाना बाबा Kamlakant Murmu ने कहा कि संताली भाषा की अपनी लिपि ओलचिकी होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि Pandit Raghunath Murmu ने वर्ष 1925 में ओलचिकी लिपि का आविष्कार किया था और आज इस लिपि के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं. उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति से जुड़ने की अपील की.

एसएनएम ट्रॉफी के 50 प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 19 अप्रैल 2026 को घाटशिला कॉलेज में आयोजित एसएनएम ट्रॉफी संताली टैलेंट सर्च क्वेस्ट परीक्षा में कुल 189 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इस परीक्षा में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से प्रतिभागी पहुंचे थे. समारोह के दौरान चयनित 50 प्रतिभागियों को ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया.
ओलचिकी को बढ़ावा देने का अभियान
संस्था प्रमुख Dr. Satyanarayan Murmu ने बताया कि इस परीक्षा का उद्देश्य ओलचिकी लिपि को बढ़ावा देना और संताली भाषी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष परीक्षा का दायरा असम और त्रिपुरा तक बढ़ाया जाएगा. साथ ही ओलचिकी में कंप्यूटर शिक्षा पर भी काम किया जा रहा है.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
समारोह में स्कूली बच्चों ने ओलचिकी में कविता पाठ, संताली नृत्य और Pandit Raghunath Murmu के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया. ओलचिकी में लिखी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई.

सरकार से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग
आयोजकों ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान जिलेभर के स्कूलों में ओलचिकी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. साथ ही सरकार से ओलचिकी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग भी की जाएगी. कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं और संताली भाषा प्रेमी शामिल हुए. अंत में कार्यक्रम का समापन “जोहार गुरु गमके रघुनाथ मुर्मू” के नारों के साथ हुआ.
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