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न्यूज वेव खासः नीति आयोग की नजर में झारखंड- भारत की वास्तविक आत्मा की जीवंत मिसाल, सीएम हेमंत सोरेन ने साझा किया प्रकृति और परंपरा का अनूठा सफर

Ranchi : झारखंड अब केवल खनिज संपदा और उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आदिम संस्कृति और नैसर्गिक सुंदरता के जरिए...

Ranchi : झारखंड अब केवल खनिज संपदा और उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आदिम संस्कृति और नैसर्गिक सुंदरता के जरिए वैश्विक पटल पर नई पहचान बना रहा है. नीति आयोग की विशेष पहल ‘दिव्य भारत- भारत की आत्मा की एक झलक’ के तहत जारी किए गए एक वीडियो ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को ‘भारत की वास्तविक आत्मा के रूप में परिभाषित किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे झारखंड की जड़ों से जुड़ाव और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है.

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प्रकृति की लय में धड़कता झारखंड

नीति आयोग के अनुसार, झारखंड का सौंदर्य इसके जंगलों की रहस्यमयी शांति और पहाड़ों के बीच रास्ता बनाती नदियों में बसता है. वीडियो में दर्शाया गया है कि यहां का हर मोड़ एक नया और अप्रत्याशित नजारा पेश करता है. यह भूमि केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक ऐसी जीती-जागती मिसाल है जहां इंसान और प्रकृति एक-दूसरे की लय में सांस लेते हैं.

आदिवासी परंपरा और अटूट विश्वास

झारखंड की पहचान इसकी पीढ़ियों पुरानी आदिवासी परंपराओं, संगीत और कला में रची-बसी है. यहां की भक्ति आडंबरों से दूर, श्रम और अटूट विश्वास पर टिकी है. यह ‘पैदल चलकर और शिखर तक चढ़कर’ पूरी होने वाली एक सरल साधना है. सामूहिक नृत्य और पारंपरिक गीत समुदायों को एक सूत्र में बांधते हैं, जो झारखंड को ‘अनेकता में एकता’ की एक जीवंत कहानी बनाता है.

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स्वाद में मिट्टी की गर्माहट

झारखंड के खान-पान को भी इस राष्ट्रीय प्रयास में विशेष स्थान मिला है. धुस्का, लिट्टी-चोखा, ठेकुआ और पीठा जैसे व्यंजनों में बसी मिट्टी की गर्माहट और सादगी सफर खत्म होने के बाद भी पर्यटकों के जेहन में बनी रहती है.

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