Dhanbad : जिले में साल 2017 से लंबित होमगार्ड बहाली का मामला एक बार फिर गरमा गया है, बहाली प्रक्रिया रद्द होने से नाराज चयनित उम्मीदवार रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान किया गया, उम्मीदवार ने आने वाला पांच मई को एक दिवसीय धरना देने और राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग करने का निर्णय लिया है.
सीडी और हार्डडिस्क गायब होने पर उठाए सवाल
बैठक में शामिल उम्मीदवार ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बहाली प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जो वीडियोग्राफी कराई गई थी, उसकी सीडी और हार्डडिस्क जिला प्रशासन के कब्जे से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई है, उम्मीदवार का कहना है कि साक्ष्यों को मिटाना अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा करता है. साक्ष्य गायब होने की सजा उन अभ्यर्थियों को दी जा रही है जिन्होंने कड़ी मेहनत से शारीरिक और तकनीकी परीक्षा पास की थी. उम्मीदवार की मांग है कि उन दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो जिन्होंने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की है.
जयराम महतो के नेतृत्व में राज्यपाल से गुहार
चयनित उम्मीदवार ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर डुमरी विधायक जयराम महतो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल से मुलाकात करेंगे, वे राज्यपाल से इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच की मांग करेंगे, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
क्या है पूरा मामला?:
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में धनबाद के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए होमगार्ड बहाली का विज्ञापन निकाला गया था, धनबाद के रेलवे मैदान में शारीरिक जांच और तकनीकी दक्षता परीक्षा आयोजित की गई थी, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई थी और चयन सूची भी जारी कर दी गई थी. चयन के बाद कुछ ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें पैसों के लेनदेन और धांधली की बात कही गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस बहाली को रद्द कर दिया.
प्रशासन की लापरवाही
जब मामले की जांच शुरू हुई, तो पता चला कि बहाली से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य (सीडी और हार्डडिस्क) गायब हैं. उम्मीदवार का तर्क है कि अगर अधिकारियों के स्तर पर कोई गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो उसकी सजा उन पात्र उम्मीदवारों को क्यों दी जा रही है जिनका चयन नियमानुसार हुआ था, उनका कहना है कि लंबे समय से वे नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण उनका भविष्य बीच में लटका हुआ है.
Also Read : नगर निगम या ‘सियासी अखाड़ा’? हजारीबाग में महापौर और नगर आयुक्त के बीच ‘आर-पार’ की जंग
