Hazaribagh: जनता के पैसे की खुली लूट या प्रशासनिक लापरवाही? यह सवाल आज हजारीबाग के गलियारों में गूंज रहा है. मंडई खुर्द स्थित डंपिंग यार्ड की एक कड़वी हकीकत सामने आई है, जहां जनता की गाढ़ी कमाई से खरीदी गई करोड़ों की आधुनिक मशीनें पिछले दो साल से सड़ रही हैं. अधिवक्ता एवं मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विवेक वाल्मीकि ने यार्ड का दौरा कर नगर निगम की पोल खोल दी है.
करोड़ों की बर्बादी: नई नवेली गाड़ियां बन रही हैं कबाड़
विवेक वाल्मीकि ने बताया कि डंपिंग यार्ड में सेप्टिक टैंक की सफाई और बड़े नालों को साफ करने वाली ऐसी गाड़ियां खड़ी हैं जो बिल्कुल नई हैं. इन गाड़ियों की स्थिति इतनी नई है कि इनके टायरों की गोटी तक नहीं घिसी है, लेकिन विडंबना यह है कि ये आज तक शहर की सड़कों पर सेवा के लिए नहीं उतरीं. यार्ड में तैनात गार्ड के अनुसार, ये मशीनें पिछले दो वर्षों से बिना किसी उपयोग के जंग खा रही हैं.
नंबर प्लेट तक नहीं, जुडिको और नगर विकास पर सवाल:
जांच में यह भी सामने आया है कि इन गाड़ियों में अब तक नंबर प्लेट या रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया है. बताया जा रहा है कि ये मशीनें नगर विकास और जुडिको द्वारा भेजी गई थीं, लेकिन इनके संचालन, चालक की नियुक्ति या रखरखाव के बजट को लेकर प्रशासन के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है.
प्रशासन से पूछे गए तीखे सवाल:
विवेक वाल्मीकि ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए प्रशासन से तीन मुख्य सवाल पूछे हैं: क्या इन गाड़ियों के मेंटेनेंस और तेल के नाम पर कागजों में पैसा निकाला जा रहा है? जब शहर जलजमाव की भीषण समस्या से जूझ रहा है, तो इन मशीनों को जनता की सेवा में क्यों नहीं लगाया गया? क्या प्रशासन का ध्यान सिर्फ खरीद-फरोख्त के ‘कमीशन’ तक ही सीमित है?
सत्ता की लड़ाई में पिसती हजारीबाग की जनता:
वर्तमान महापौर और नगर आयुक्त के बीच चल रही खींचतान के कारण शहर का विकास ठप पड़ा है. विवेक वाल्मीकि ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे मजदूरों के हक और जनता के पैसे की इस लूट के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने हजारीबाग नगर निगम और वर्तमान महापौर से इस ‘सफेद हाथी’ जैसी बर्बादी पर जवाब मांगा है
