Ranchi: झारखंड की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी ने माहौल गर्म कर दिया है. इस बार इरफान अंसारी के तीखे और व्यंग्यात्मक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. उन्होंने लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ऐसा तंज कसा, जो अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है.
लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इरफान अंसारी ने कहा कि अब लोकतंत्र शायद “आउटसोर्स” हो चुका है, जहां जनता की भूमिका सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह गई है. उनका कहना था कि वोट तो जनता डालती है, लेकिन फैसले कहीं और होते दिखाई देते हैं. इस बयान को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधा सवाल माना जा रहा है.
EVM और तकनीक पर तंज, बहस फिर तेज
उन्होंने आधुनिक तकनीक पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव इतने “सहज” हो गए हैं कि अब संदेह होना स्वाभाविक लगता है. नतीजों को लेकर उन्होंने तंज कसा कि अब “ईवीएम से ज्यादा कल्पना शक्तिशाली” नजर आती है. इस टिप्पणी ने एक बार फिर ईवीएम को लेकर चल रही बहस को हवा दे दी है.
लोकतंत्र की भूमिका पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र का स्तर इतना “उन्नत” हो गया है कि अब खुद मतदाता ही अपने अधिकार और भूमिका को लेकर भ्रमित है. चुनाव अब एक “भागीदारी कार्यक्रम” बनकर रह गया है, जहां जनता लाइन में लगती है, लेकिन असली निर्णय कहीं और तय होते हैं. उन्होंने इसे व्यंग्य में “शानदार टीमवर्क” बताया.
