Hazaribagh: सरकारी योजनाओं को लागू करने में और उन्हें जनता को समर्पित करने में राजनीति दल और सरकार कितनी संवेदनशील है इसकी बानगी हजारीबाग में देखने को मिलती है. ताजा उदाहरण चुरचू प्रखंड है, जहां एक विद्युत सब स्टेशन का निर्माण 10 साल पहले किया गया था, लेकिन आज तक इस विद्युत सब स्टेशन को चालू नहीं किया जा सका. बताते हैं कि हजारीबाग ज़िला के चुरचू, दारू, केरेडारी, टाटीझरिया प्रखंडों में एक साथ एक ही दिन में तूफ़ानी दौरा करके तत्कालीन केंद्रीय वितमंत्री यशवंत सिन्हा के द्वारा विद्युत सब स्टेशन की नींव रखी गई थी. चुरचू प्रखंड छोड़कर बाकी सभी प्रखंडों में बिजली सब स्टेशन बनकर तैयार हो कर चालू भी हो गया है, लेकिन यह नहीं शुरू हुआ. विगत लगभग दस वर्षों से विद्युत सब स्टेशन बनकर तैयार है और धूल फांक रहा है. इसे विभागीय लापरवाही कहें या फिर उदासीनता, इतने दिन बीत चुके हैं लेकिन आज तक यह सब स्टेशन चालू नही हो पाया.
वन विभाग नहीं दे रहा एनओसी
फिलहाल वन विभाग के द्वारा एनओसी नहीं मिलने के कारण बिजली सब स्टेशन पर ग्रहण लगा हुआ है. यदि यह चालू हो जाता है तो चुरचू प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के आंगो पंचायत, कीमो पंचायत व बेड़म पंचायत के कई गांव बिजली की समस्या से मुक्त हो जाते. इसके निर्माण होने से इलाके के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें बिजली की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन उनके उम्मीदों पर पानी फिरने लगा है. विद्युत पावर सब स्टेशन निर्माण में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया गया है. इधर बिजली विभाग का कहना है विभाग ने सर्वे करके वन विभाग को रिपोर्ट भेज दी है. सब स्टेशन से लेकर सिलवार फीडर, जहां से बिजली कनेक्शन करना है, वहां तक की कुल दूरी 18 किलो मीटर की है. इस संबंध में कागजात वन विभाग को दे दिया गया है. एनओसी नहीं मिलने के कारण यह चालू नहीं हो सका.
बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा : मुखिया
इस संबंध में पंचायत के मुखिया पूनम बेसरा ने बताया कि चुरचू में सब स्टेशन का निर्माण तो किया गया लेकिन 33 हजार केवी के तार कनेक्शन नही होने कारण चुरचू सब स्टेशन चालू नही हो पाया. सब स्टेशन चालू हो जाने से बिजली की समस्या से निजात पाया जा सकता है. फिलहाल आलम यह है कि बिजली की अव्यवस्था क्षेत्र में चरम पर है.
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सर्वे रिपोर्ट वन विभाग को भेज दी गई : एसडीओ
इस मामले को लेकर बिजली विभाग के एसडीओ अमित कुमार से दूरभाष पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया की संबंधित सर्वे रिपोर्ट वन विभाग को भेज दी गई है. लेकिन एनओसी के नहीं मिलने के कारण यह अधर में लटका हुआ है.
