Ranchi: कहते हैं कि हौसले अगर फौलादी हों, तो अभावों की तपिश भी रास्ता नहीं रोक सकती. झारखंड की राजधानी रांची की गलियों से एक ऐसी ही प्रेरक दास्तान निकलकर सामने आई है, जो उन युवाओं के लिए नजीर है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं. यह कहानी है कृष्णा लोहार की, जिसने रांची के एक होटल चौपाल में दिन रात हाड़ तोड़ मेहनत करते हुए भी अपनी पढ़ाई जारी रखी. जब भी समय मिला, किताब उठाया और पढ़ाई की. इसका परिणाम भी सुखद रहा. कृष्णा ने जैक इंटरमीडिएट आर्ट्स की परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया.
हाड़तोड़ मेहनत और पढ़ाई का अनूठा संगम
कृष्णा की दिनचर्या किसी आम छात्र जैसी नहीं रही. वह राजधानी के एक होटल चौपाल में सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक कमरतोड़ मेहनत करता है. जब दुनिया सो रही होती या आराम कर रही होती, तब कृष्णा अपनी गरीबी से लड़ रहा होता है. रांची के संत पॉल कॉलेज के इस छात्र ने विषम परिस्थितियों के बीच इंटर ऑर्ट्स में 324 अंक प्राप्त कर न केवल प्रथम श्रेणी से सफलता हासिल की, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि सफलता किसी विरासत की मोहताज नहीं होती.

भावुक कर देने वाली पारिवारिक पृष्ठभूमि
कृष्णा का संघर्ष सिर्फ काम तक सीमित नहीं है, उसकी जड़ें बेहद गहरी और भावुक हैं. घर की स्थिति ऐसी है कि माता-पिता खेती-बारी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी का इंतजाम करते हैं. तीन बहनों की शादी के बाद घर की आर्थिक जिम्मेदारी का बोझ कृष्णा के कंधों पर आ गया. एक भाई दिव्यांग है, जिसकी देखभाल और परिवार की ‘गाड़ी’ को खींचने के लिए कृष्णा ने पढ़ाई के साथ-साथ होटल की नौकरी को चुना.
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प्रतिभा को मिला मान: News Wave ने किया सम्मानित
कृष्णा के इस अदम्य साहस और सफलता को देखते हुए News Wave कार्यालय में उसे विशेष रूप से सम्मानित किया गया. संस्थान ने उसकी प्रतिभा को न केवल सराहा, बल्कि उसके इस जज्बे को सलाम भी किया. आज कृष्णा उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो मजदूरी और अभावों के बीच अपने सपनों को दम तोड़ने देते हैं. कृष्णा की यह कामयाबी बताती है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो होटल की थकान भी लक्ष्य के बीच में नहीं आ सकती. News Wave इस प्रतिभावान युवा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है.
