राजधानी रांची में पत्ता खड़कते ही हो जाती है बिजली गुल, 450 करोड़ का प्रोजेक्ट ख़ुद हो गया अंडरग्राउंड

Ranchi: शनिवार की देर शाम जैसे ही बादलों ने अपनी पहली गर्जना सुनाई और हल्की बारिश शुरू हुई, वैसे ही रांची शहर...

Ranchi: शनिवार की देर शाम जैसे ही बादलों ने अपनी पहली गर्जना सुनाई और हल्की बारिश शुरू हुई, वैसे ही रांची शहर की बिजली ने दम तोड़ दिया. कहने को तो यह झारखंड की राजधानी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां पत्ता भी खड़कता है, तो बिजली गुल हो जाती है. शनिवार की शाम रांची के कई इलाकों में घंटों ब्लैकआउट रहा, जबकि विभाग के अधिकारी फॉल्ट सुधारने का पुराना राग अलाप रहे थे. मानसून तो अभी आया भी नहीं है, महज एक प्री-मानसून बौछार ने विभाग के दावों की कलई खोलकर रख दी है.

यह भी पढ़ें: एनआईए कोर्ट का ‘डेडलाइन’ एक्शन: नक्सली रविन्द्र गंझू 30 दिन में हाजिर हो, वरना बिना पकड़े ही शुरू हो जाएगी सजा की प्रक्रिया

450 करोड़ का प्रोजेक्ट हो गया अंडरग्राउंड

आज से लगभग छह साल पहले सरकार और विभाग ने जनता को सुनहरे ख्वाब दिखाए थे. दावा किया गया था कि 450 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड केबलिंग का काम पूरा होगा, जिसके बाद आंधी-पानी में भी निर्बाध बिजली मिलेगी. लेकिन आज छह साल बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट खुद ‘अंडरग्राउंड’ हो चुका है. करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी शहर के बड़े हिस्से में नंगे तार मौत को दावत दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: सरायकेला: विभिन्न क्षेत्रों में आयुष स्वास्थ्य शिविर आयोजित, 150 से अधिक लोगों का किया गया सेहत की जांच

समीक्षा बैठकों मे निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा

हर महीने बिजली विभाग और प्रशासनिक गलियारों में उच्च स्तरीय ‘समीक्षा बैठकें’ होती है. बड़े-बड़े फरमान जारी किए जाते हैं कि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और मानसून से पहले तैयारी पूरी हो. लेकिन शनिवार की शाम ने यह साबित कर दिया कि ये आदेश सिर्फ फाइलों तक ही सीमित हैं. जमीन पर न तो कोई तैयारी दिखी और न ही अधिकारियों में कोई जवाबदेही.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *