Ranchi: झारखंड के शिक्षा जगत में कमीशनखोरी का एक बड़ा सिंडिकेट फल-फूल रहा है. राज्य के निजी स्कूलों ने नियमों को ताक पर रखकर शिक्षा को शुद्ध व्यापार बना दिया है. नियमानुसार स्कूलों में एनसीइआरटी की मानक किताबों से पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन हकीकत इसके उलट है. बाजार में हेल्पबुक के नाम पर एनसीइआरटी की हूबहू डुप्लीकेट और पाइरेटेड किताबें बेची जा रही हैं, जिनमें न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है और न ही सरकारी नियमों का.
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कमीशन का गणित, 40 फीसदी तक की मोटी कमाई
हैरानी की बात यह है कि किताबों के चयन के लिए किसी कमेटी का अस्तित्व तक नहीं है. सारा खेल प्रकाशकों, दुकानदारों और स्कूल मैनेजमेंट के बीच साठगांठ से चल रहा है, सूत्रों के अनुसार, नर्सरी से 5वीं तक किताबों की बिक्री पर स्कूल मैनेजमेंट को 30 फीसदी कमीशन मिलता है. 5वीं से 10वीं तक ऊंचे दामों वाली किताबों पर यह कमीशन 40 फीसदी तक पहुंच जाता है.
बिना लोगो की पाइरेटेड किताबें और निशाने पर रहे लेखक
बाजार में उपलब्ध इन नकली किताबों में एनसीइआरटी का टेक्स्ट और जवाब तो छपे हैं, लेकिन आधिकारिक एनसीइआरटी लोगो नदारद है. ब्रांडेड और नामी लेखकों की किताबों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया है.
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इन प्रकाशनों की पाइरेटेड कॉपियां धड़ल्ले से बिक रही
• गणित: आरएस अग्रवाल और केसी सिन्हा की मैथ बुक्स.
• विज्ञान: प्रदीप प्रकाशन की फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी.
• हायर फिजिक्स: एससी वर्मा की प्रसिद्ध किताबें.
• अन्य किताबें: कॉम्प्रिहेंसिव एबीसी और एनसीइआरटी की तमाम फर्जी हेल्पबुक्स.
