“गांव की आवाज सीधे DC दरबार तक,” तमाड़ के ग्राम प्रधानों ने उठाई व्यवस्था सुधार की हुंकार

Tamad: सिर्फ एक मांग पत्र नहीं, बल्कि गांवों की धड़कनों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास उस वक्त देखने को मिला, जब...

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उपायुक्त को मांग पत्र सौंपते प्रतिनिधिमंडल के सदस्य

Tamad: सिर्फ एक मांग पत्र नहीं, बल्कि गांवों की धड़कनों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास उस वक्त देखने को मिला, जब तमाड़ प्रखंड ग्राम प्रधानों की तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल टीम ने रांची उपायुक्त से मुलाकात कर ग्रामीण व्यवस्था से जुड़ी छह अहम समस्याओं को मजबूती से रखा. टीम में अध्यक्ष यदु गोपाल सिंह मुंडा, सचिव राधा गोविन्द सिंह मुंडा एवं वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मण सिंह मुंडा शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि तमाड़ के कई गांव आज भी बिना ग्राम प्रधान और डाकुआ के प्रशासनिक समन्वय के चल रहे हैं, जिससे ग्रामीण व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

उपायुक्त से की गई ये मांगे

मांग पत्र में मुख्य रूप से रिक्त पड़े ग्राम प्रधान एवं डाकुआ की जल्द नियुक्ति, मानकी-मुंडा एवं ग्राम प्रधानों को मिलने वाली सम्मान राशि का शीघ्र भुगतान, खराब पड़े चापाकल और पेयजल सोलर टंकियों की मरम्मत, पेसा एक्ट के अनुरूप पारंपरिक ग्राम सभाओं को अधिकारिक मजबूती देने तथा लंबे समय से खाली पड़े प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पद पर तत्काल पदस्थापन की मांग शामिल थी.

उपायुक्त ने जल्द नियुक्ति सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

मुलाकात के दौरान उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए. बताया गया कि खाली पड़े BDO पद पर जल्द नियुक्ति सुनिश्चित करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है, ताकि तमाड़ में प्रशासनिक कार्यों की गति फिर से पटरी पर लौट सके. वहीं उपायुक्त ने मौके पर ही अंचलाधिकारी समरेश प्रसाद भंडारी को फोन कर निर्देश दिया, कि प्रखंड में रिक्त पड़े ग्राम प्रधान/डाकुआ पदों एवं अन्य ज्वलंत समस्याओं की वास्तविक रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि नियमानुसार नियुक्ति और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके.

इस मुलाकात को ग्रामीण नेतृत्व और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद के रूप में देखा जा रहा है. गांवों की परंपरागत व्यवस्था, पेयजल संकट और प्रशासनिक रिक्तियों जैसे मुद्दों को जिस स्पष्टता और मजबूती से उठाया गया, उसने यह संकेत दे दिया है कि अब तमाड़ के गांव अपनी समस्याओं को दबाकर नहीं, बल्कि संगठित होकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

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