Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार पर चुनाव खत्म होते ही देश की असली आर्थिक स्थिति सामने लाने का आरोप लगाया है. झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव तक सरकार महंगाई, आर्थिक संकट और वैश्विक दबाव पर चुप रही, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए, जनता को “कम खर्च करो, कम घूमो और कम खरीदो” का उपदेश दिया जाने लगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पेट्रोल बचाने, सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएं रोकने और विदेशी सामान छोड़ने की सलाह दे रहे हैं, जबकि वैश्विक तनाव और आर्थिक संकट कोई नई बात नहीं है. झामुमो ने सवाल उठाया कि अगर हालात इतने गंभीर थे तो चुनाव से पहले देश को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई.
बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार अब जनता से त्याग मांग रही
विनोद पांडेय ने कहा कि सरकार ने चुनावी फायदा उठाने के लिए सच्चाई छिपाई और अब जनता पर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि “विश्वगुरु”, “न्यू इंडिया” और “5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार अब जनता से त्याग मांग रही है, जिससे उसकी आर्थिक नीतियों की हकीकत उजागर हो चुकी है.

झामुमो ने मोदी सरकार की विदेश नीति को भी निशाने पर लिया. पार्टी ने कहा कि जिन देशों को कभी भारत का सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया जाता था, वही अब दूरी बनाते नजर आ रहे हैं. सरकार अमेरिका के दबाव में झुकती दिखाई दे रही है और उसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है.
पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में महंगाई बेलगाम है, बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता की जेब खाली की जा रही है. इसके बावजूद सरकार समाधान देने के बजाय लोगों को कम खर्च करने की नसीहत दे रही है.
प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर भी सवाल
विनोद पांडेय ने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग इतनी जरूरी है, तो सरकार खुद उसका पालन क्यों नहीं करती. जनता को त्याग का संदेश देने वाली सरकार खुद ऐशो-आराम और विदेशी दौरों से पीछे नहीं हट रही.
झामुमो महासचिव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में जनता से कभी थाली बजवायी गई, कभी मोमबत्ती जलवायी गई और अब कहा जा रहा है कि कम चलो, कम खरीदो और कम जियो. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतने लंबे शासन के बाद भी सरकार के पास जनता के त्याग के अलावा कोई समाधान नहीं है, तो फिर विकास के दावे सिर्फ प्रचार साबित हुए हैं.
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