Ranchi: झारखंड के खेतों में इस बार मानसून की बेरुखी का डर नहीं, बल्कि तैयारी का जज्बा दिखेगा. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला का मंगलवार को समापन हुआ. इस वर्कशॉप ने राज्य को केवल इस साल के लिए ही नहीं, बल्कि अगले एक दशक के लिए अल्पवृष्टि से निपटने का अभेद्य कवच प्रदान किया है.
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चुनौती बड़ी है, पर तैयारी पूरी: शिल्पी नेहा तिर्की
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया कि ‘अल नीनो’ प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना एक गंभीर चुनौती है. उन्होंने कहा कि आने वाला मौसम सीमांत किसानों के लिए कठिन हो सकता है, लेकिन विभाग पूरी तरह तैयार है. हम न केवल समय पर बीज सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि इस कर्मशाला के निष्कर्षों को जिला और प्रखंड स्तर पर ‘खरीफ मेलों’ के जरिए सीधे खेतों तक पहुंचाएंगे.
अगले 10 वर्षों का विजन डॉक्यूमेंट तैयार
बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दूबे ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दो दिनों के मंथन के बाद एक ऐसी रूपरेखा तैयार की गई है, जो अगले 10 वर्षों तक राज्य की कृषि नीति का आधार बनेगी. पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन और डॉक्यूमेंट्री के जरिए बताया गया कि कम पानी में कौन सी किस्में बंपर पैदावार देंगी. जिला कृषि पदाधिकारियों ने जमीन के प्रकार के अनुसार फसल प्रबंधन का ब्यौरा पेश किया. कार्यक्रम के दौरान खरीफ कर्मशाला पुस्तिका का विमोचन किया गया.
