Giridih: जिले में भीख मांगकर जीवनयापन करने वाले बच्चों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों के संरक्षण और पुनर्वास को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीर पहल शुरू कर दी है. उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में “Advisory for the Protection and Rehabilitation of Uneducated Children, Women and Differently-abled Individuals Engaged in Begging” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई.
जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि भीख मांगना केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि मानव गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय है. समाज के वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाकर ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने और उनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया.

उपायुक्त ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र, सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों के आसपास तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर नियमित जांच एवं पहचान अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़ सकें.
उपायुक्त ने विभागों को दिए कई निर्देश
बैठक में सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया कि चिन्हित व्यक्तियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा जरूरतमंदों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए. इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराने को कहा गया.
शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि भीख मांगते पाए जाने वाले बच्चों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर विद्यालयों से जोड़ा जाए. साथ ही बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उनकी देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जाए.
उपायुक्त ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश देते हुए कहा कि “भीख मांगना अपराध है”, “बच्चों से भीख मंगवाना दंडनीय अपराध है” तथा “जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन देना समाज की जिम्मेदारी है” जैसे संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए. इसके लिए पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया.
बैठक में “उम्मीद” एनजीओ को जिले में सर्वे एवं डाटा संग्रहण का कार्य तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया गया. सर्वे के दौरान चिन्हित व्यक्तियों का नाम, आयु, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और वर्तमान परिस्थिति से जुड़ी जानकारी एकत्र कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया. साथ ही सभी सूचनाओं को निर्धारित पोर्टल एवं डैशबोर्ड पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया, ताकि पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके.
उपायुक्त ने सभी विभागों को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को बेहतर भविष्य और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है.
बैठक में पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, अपर समाहर्ता बिजय सिंह बीरूआ, अनुमंडल पदाधिकारी खोरीमहुआ अनिमेष रंजन, सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे.
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