– राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अब निजी और सरकारी स्कूलों के लिए तय होंगे न्यूनतम मानक, पारदर्शिता के लिए बनेगा डिजिटल डेटाबेस
Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विजन को धरातल पर उतारते हुए सरकार ने ‘राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण’ के गठन की औपचारिक स्वीकृति दे दी है. यह स्वतंत्र निकाय राज्य के सभी निजी, सार्वजनिक और परोपकारी स्कूलों के लिए स्व-विनियमन, मान्यता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम करेगा.
जेसीईआरटी मुख्यालय से संचालित होगा नया प्राधिकरण
सरकार के निर्णय के अनुसार, इस नए प्राधिकरण का मुख्यालय रांची के रातू स्थित झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (जेसीईआरटी) के डायट कैंपस में होगा. यह निकाय पूरे राज्य में शैक्षिक मानकों को बनाए रखने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ जोड़ने के लिए उत्तरदायी होगा. प्राधिकरण की कमान आठ सदस्यीय समिति के हाथों में होगी, जिसके अध्यक्ष निदेशक, जेसीईआरटी होंगे. समिति में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षा निदेशकों सहित राज्य परियोजना निदेशक (जेईपीसी) जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.

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पारदर्शिता के लिए ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ पोर्टल का सहारा
प्राधिकरण के गठन का एक मुख्य उद्देश्य स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है. अब स्कूलों से जुड़ी सभी बुनियादी नियामक जानकारियां, उनकी मान्यता की स्थिति और मानकों के अनुपालन का विवरण सार्वजनिक रूप से साझा किया जाएगा. यह डेटा ‘राज्य विद्या समीक्षा केंद्र’ पोर्टल के माध्यम से जनता के लिए उपलब्ध होगा, जिससे शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ेगी. इसके अलावा, प्राधिकरण छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र मंच के रूप में भी कार्य करेगा.
न्यूनतम मानकों का निर्धारण और ‘परख’ के साथ सहयोग
यह प्राधिकरण स्कूलों के लिए बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा, शासन और वित्तीय ईमानदारी जैसे विषयों पर न्यूनतम मानक तय करेगा. इसके लिए प्राधिकरण ‘परख’ के साथ मिलकर काम करेगा ताकि शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर के बेंचमार्क स्थापित किए जा सकें. विशेष बात यह है कि अब पारंपरिक निरीक्षण प्रणाली के बजाय ‘स्व-प्रकटीकरण मॉडल’ को अपनाया जाएगा, जहाँ स्कूल स्वयं अपने संसाधनों और परिणामों का विवरण पोर्टल पर प्रस्तुत करेंगे.
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अकादमिक समिति करेगी निगरानी और मूल्यांकन
प्राधिकरण को तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग देने के लिए एक ‘अकादमिक समिति’ का भी गठन किया गया है. यह समिति ‘स्कूल गुणवत्ता आकलन एवं आश्वासन की रूपरेखा’ तैयार करेगी और इसे लागू करने की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. 15 सदस्यीय इस समिति में सरकारी स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षा विशेषज्ञों और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी मनोनीत किया जाएगा, जिनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा.
बजट और भविष्य की कार्ययोजना
प्राधिकरण और अकादमिक समिति के संचालन का खर्च जेसीईआरटी को प्राप्त होने वाले ‘स्थापना मद’ की राशि से वहन किया जाएगा. प्राधिकरण को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अगस्त माह तक अपनी बजट और कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी. साथ ही, यह निकाय हर साल अपने कार्यों की विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह संकल्प तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इससे संबंधित पुराने सभी आदेश या अधिसूचनाएं अब निष्प्रभावी मानी जाएंगी.
