Ranchi : रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस हिरासत और जेल में होने वाली मौतों को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब पुलिस कस्टडी, जेल में मौत और रेप से जुड़े मामलों में ज्यूडिशियल इंक्वायरी अनिवार्य होगी.
मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 (1 ‘अ’) और बीएनएसएस की धारा 196 (2) के तहत ऐसी घटनाओं की न्यायिक जांच कराना जरूरी होगा.

250 मामलों में जांच नहीं होने पर मांगी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि राज्य में हिरासत और जेल में मौत के लगभग 500 मामले सामने आए थे, जिनमें से करीब 250 मामलों में ज्यूडिशियल जांच नहीं कराई गई. इस पर हाईकोर्ट ने सभी संबंधित जिला जजों को कारण सहित रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
झालसा और एनएचआरसी को भी निर्देश
अदालत ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Jharkhand State Legal Services Authority) को निर्देश दिया है कि हिरासत, जेल में मौत और रेप मामलों की ज्यूडिशियल जांच की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) के साथ मिलकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया जाए.
अब तक कार्यपालक दंडाधिकारी करते थे जांच
बताया गया कि अब तक राज्य में हिरासत या जेल में मौत के मामलों की जांच कार्यपालक दंडाधिकारी यानी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से कराई जाती थी. लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब न्यायिक जांच अनिवार्य हो गई है.
अदालत में अधिवक्ता ने रखा पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सादाब अंसारी ने पक्ष रखा. हाईकोर्ट के इस फैसले को मानवाधिकार और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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