Bermo: डीवीसी कोनार डैम में विस्थापितों के दशकों पुराने दर्द और उनके हक की आवाज को बुलंद करने के लिए गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने एक निर्णायक पहल की है. डीवीसी कोनार डैम के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सांसद ने कोनार के परियोजना प्रमुख राणा रणजीत सिंह और अन्य उच्चाधिकारियों के साथ विस्थापितों की गंभीर समस्याओं पर गुरुवार को बैठक की.
इस बैठक का मुख्य केंद्र बोकारो और हजारीबाग जिले के बनासो, नावाटांड सहित उन तमाम गांवों के रैयतों का संघर्ष रहा, जिन्हें 70 साल पहले इस परियोजना के लिए विस्थापित तो कर दिया गया, लेकिन आज सात दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी ही जमीन का मालिकाना हक नसीब नहीं हुआ है.

विस्थापितों की समस्याओं को सांसद ने जोरदार तरीके से उठाया
सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने अधिकारियों के समक्ष विस्थापितों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्षों बाद भी विस्थापित बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि विस्थापित परिवारों को अविलंब जमीन का मालिकाना हक दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने उन क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, जो किसी भी सभ्य समाज की प्राथमिक आवश्यकताएं हैं.
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि डीवीसी प्रबंधन को अपनी जवाबदेही तय करते हुए इन समस्याओं का स्थाई समाधान निकालना होगा ताकि विस्थापितों को उनका वाजिब सम्मान और अधिकार मिल सके.
बैठक में बड़ी संख्या में शामिल हुए विस्थापित ग्रामीण
सांसद के साथ उनके प्रतिनिधि जितेंद्र यादव, दीपक महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय संगठन महासचिव सह विस्थापित नेता महेंद्र प्रसाद महतो उर्फ माही पटेल और विस्थापित अध्यक्ष सुशील महतो सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे.
बैठक में सचिव सुरेश राम, मुखिया कुंवर हांसदा, आजसू प्रखंड अध्यक्ष अजय मंडल, मांडू विधायक प्रतिनिधि महादेव देहाती और पूर्व मुखिया कैलाश महतो सहित बड़ी संख्या में विस्थापित ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर एकता का परिचय दिया. सभी ने एक स्वर में मांग की कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि विस्थापितों का भविष्य सुरक्षित हो सके.
