Gumla: चैनपुर थाना क्षेत्र के बम्हनी मोड़ के समीप गुरुवार को दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने टक्कर में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. जानकारी देते हुए गुरुवार की शाम छह बजे बताया गया, कि घायलों की हालत गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद सभी को गुमला सदर अस्पताल रेफर किया गया. लेकिन हादसे से भी ज्यादा शर्मनाक तस्वीर चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिली, जहां अस्पताल की बदहाल व्यवस्था ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी.
चारों युवक गंभीर रूप से घायल
मिली जानकारी के अनुसार, नातापोल निवासी सुरेश खेस, जेम्स मिंज तथा दर्पण टोप्पो एक ही बाइक पर सवार होकर साप्ताहिक बाजार जा रहे थे. इसी दौरान विपरीत दिशा से रांची की ओर जा रहे छीछिवानी निवासी सुमित लोहारा की बाइक से बम्हनी मोड़ के पास सीधी भिड़ंत हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चारों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए.

वहीं, घटना की सूचना मिलते ही उप प्रमुख प्रमोद खलखो, जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, मुखिया शोभा देवी तथा पंचायत समिति सदस्य आशा देवी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से घायलों को चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. इधर, हादसे की सूचना मिलते ही चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार एवं एएसआई संतोष धर्मपाल लुगुन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है.
अस्पताल में न डॉक्टर, न बेड और न ही आपातकालीन व्यवस्था
अस्पताल पहुंचते ही जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया. अस्पताल में न डॉक्टर मौजूद थे, न पर्याप्त बेड और न ही आपातकालीन व्यवस्था. हालात इतने खराब थे कि खून से लथपथ घायलों को मजबूरन जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ा. इलाज के नाम पर केवल सीएचओ के भरोसे अस्पताल चलता दिखाई दिया.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी. चिकित्सा प्रभारी से संपर्क करने पर कभी डीजल नहीं होने तो कभी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई. जनप्रतिनिधियों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली लापरवाही बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई.
नियादी सुविधाओं का अभाव क्षेत्र की बदकिस्मती
उप प्रमुख प्रमोद खलखो ने कहा कि चैनपुर अनुमंडल अस्पताल का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह गया है. आपातकालीन स्थिति में डॉक्टरों का गायब रहना बेहद शर्मनाक है और यह सीधे आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है. वहीं जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सक, एंबुलेंस और बुनियादी सुविधाओं का अभाव क्षेत्र की बदकिस्मती बन गया है.
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल में घायल मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़े, तब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही स्वास्थ्य व्यवस्था जागेगी, या फिर चैनपुर की जनता यूं ही बदहाल सिस्टम की कीमत अपनी जान देकर चुकाती रहेगी?
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