Saraikela: चांडिल पातकोम दिशोम मांझी परगना महाल का दो दिवसीय वार्षिक महासम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया. चांडिल स्थित शीशमहल में शनिवार और रविवार को संथाल समाज का यह वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया. शनिवार को सम्मेलन का शुभारंभ अमर शहीद सिद्धू-कान्हू एवं पंडित रघुनाथ मुर्मू की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. सम्मेलन की अध्यक्षता पातकोम दिशोम देश परगना रामेश्वर बेसरा ने की.
यह भी पढ़ें: खुद ‘बीमार’ है चाईबासा का एकमात्र सदर अस्पताल, टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन और 8 माह से बंद ब्लड बैंक- पवन शंकर पांडे

संस्कृति के संरक्षण पर जोर
सम्मेलन में दुगनी पीढ़ परगना दिवाकर सोरेन, सालखन सोरेन, बाबलू मुर्मू, खरसावां के मानकी दोलू सिंह सरदार, चारुचांद किस्कु, श्यामल मार्डी, कुनाराम सोरेन, महेश्वर मुर्मू समेत कई वक्ताओं ने समाज की मजबूती, शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक एकता को लेकर अपने विचार व्यक्त किए. वक्ताओं ने संथाली भाषा, ओल चिकी लिपि और पारंपरिक शासन व्यवस्था ‘मांझी-परगना’ को और सशक्त करने पर जोर दिया.
यह भी पढ़ें: साहिबगंज: बरहरवा-हिरणपुर मुख्य मार्ग पर पुल में हो रहा धंसान, हादसे को दे रहा आमंत्रण
मांझी बाबाओं और समाजसेवी का सम्मान
संताल समाज में उत्कृष्ट काम करने वाले मांझी बाबाओं को ‘पांची गमछा’ देकर सम्मानित किया गया. वहीं 35 वर्षों से लगातार साइकिल से गांव-गांव घूमकर समाज को जागरूक करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता पूर्ण चंद्र बेसरा को पातकोम दिशोम मांझी परगना महाल की ओर से नई साइकिल देकर सम्मानित किया गया. दो दिन तक चले इस वार्षिक महासम्मेलन को संबोधित करते हुए पातकोम दिशोम देश परगना रामेश्वर बेसरा ने कहा, “हमारी एकता ही हमारी ताकत है. जल, जंगल, जमीन और अपनी भाषा-संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा.” सम्मेलन में सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों से बड़ी संख्या में मांझी, परगना, जोगमांझी और संथाल समाज के लोग शामिल हुए. कार्यक्रम का समापन पारंपरिक मांदर की थाप और सामूहिक नृत्य के साथ हुआ.
