Ranchi: झारखंड के 3 से 4 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना दर्द बयां किया है. उन्होंने कहा है कि वे डिजिटल झारखंड और ई-गवर्नेंस जैसी बड़ी योजनाओं को जमीन पर उतारते हैं, लेकिन खुद आज भुखमरी की कगार पर हैं. प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन कर्मियों को जनवरी से यानी पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

अनुबंध खत्म, नई प्रक्रिया अब तक अधूरी
दरअसल, जैप-आईटी रांची और आउटसोर्स एजेंसियों के बीच का सेवा अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो चुका है. इसके बाद न तो इस अनुबंध की अवधि बढ़ाई गई और न ही नई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया पूरी की गई.
कर्मचारियों ने जताई परेशानी
झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव की अगुवाई में झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल-2025 बनाया गया था. वित्त विभाग ने जून 2025 में इसका संकल्प भी जारी किया, लेकिन एक साल बाद भी नई निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका.
सरकार से समाधान की मांग
कर्मचारियों का कहना है कि इतने मानसिक तनाव के बाद भी वे पूरी निष्ठा से सरकारी काम संभाल रहे हैं. कर्मचारी संघ ने सरकार और जैप-आईटी प्रबंधन से मांग की है कि अनुबंध का तुरंत समाधान कर बकाया वेतन का भुगतान किया जाए, ताकि हजारों परिवारों को इस गंभीर आर्थिक और सामाजिक क्षति से बचाया जा सके.
फैक्ट फाइल
बजट आवंटन नहीं होने से जनवरी 2026 से वेतन लंबित.
31 मार्च को पुराना अनुबंध खत्म, सेवा विस्तार पर अब तक चुप्पी.
बच्चों की पढ़ाई छूटी, इलाज ठप और बैंक की किस्तें (ईएमआई) रुकीं.
