Ranchi: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धाराओं के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ करने वाले सेवानिवृत्त झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मतियस विजय टोप्पो की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कोर्ट से भले ही उन्हें तकनीकी आधार पर सेवा से बर्खास्तगी के आदेश से फौरी राहत मिल गई हो, लेकिन झारखंड सरकार ने अब उनके खिलाफ नए सिरे से जांच करने का फैसला लिया है. सरकार ने अब झारखंड पेंशन नियमावली के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने आदेश दिया है.

क्या है पूरा मामला और नया मोड़?
दरअसल, रांची के विशेष विनियमन पदाधिकारी के रूप में अपनी तैनाती के दौरान मतियस विजय टोप्पो पर सीएनटी एक्ट की धारा-71(ए) के परंतुक-II का दुरुपयोग करने का बेहद गंभीर आरोप है. उन्होंने बिना किसी उचित जांच के, कुल 391 मामलों में आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण को नियमित कर मुआवजा तय कर दिया था. इसके बाद सरकार ने 30 जनवरी 2025 को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. इस बर्खास्तगी के खिलाफ टोप्पो ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को उनकी बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया, लेकिन साथ ही विभाग को यह छूट भी दे दी कि वे पेंशन नियमावली के तहत नए सिरे से जांच कर 6 महीने के भीतर फैसला लें.
अब 352 मामलों में नए सिरे से फंसा पेंच
मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद रांची के उपायुक्त ने नए सिरे से आरोप पत्र गठित किया है. इस नए प्रपत्र में टोप्पो पर कुल 352 मामलों में नियम विरुद्ध आदेश पारित करने का आरोप दर्ज है. कार्मिक विभाग के संकल्प के अनुसार, मतियस विजय टोप्पो को इस आदेश के मिलने के 15 दिनों के भीतर नवनियुक्त संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना लिखित बचाव बयान दर्ज कराना होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुनील कुमार को इस मामले का संचालन पदाधिकारी (जांच अधिकारी) नियुक्त किया गया है, जबकि रांची के अपर समाहर्ता इस मामले में उपस्थापन पदाधिकारी की भूमिका निभाएंगे.
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