Ranchi: झारखंड में आसमानी बिजली जानलेवा कहर बरपा रही है. झारखंड मौत का मैग्नेटिक ट्रैप बन कर उभरता जा रहा है. पिछले 24 घंटों के भीतर झारखंड के अलग-अलग जिलों में ठनका गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई. मौसम विभाग की तमाम चेतावनियों और येलो अलर्ट धरे के धरे रह गए और कुदरत के इस ‘इलेक्ट्रिक शॉक’ ने राज्य को दहला कर रख दिया है. इस आसमानी कहर की सबसे दर्दनाक तस्वीर राजधानी रांची के इटकी थाना क्षेत्र के कुल्ली गांव से आई. एक 12 साल की मासूम बच्ची अपने माता-पिता के साथ पेड़ से आम तोड़ रही थी. अचानक आसमान में एक भयानक गर्जना हुई और पलक झपकते ही बिजली सीधे उस बच्ची पर आ गिरी. वहीं गढ़वा जिले का कांडी थाना क्षेत्र में 45 वर्षीय महिला ठनका की सीधी चपेट में आ गई, जिससे उनकी जान चली गई. गढ़वा में कुल दो, जबकि रांची, धनबाद और बोकारो में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई.

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देश का नया लाइटनिंग हॉटस्पॉट झारखंड
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम्स प्रमोशन काउंसिल की वार्षिक रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि झारखंड देश के सबसे खतरनाक ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट’ के रूप में उभर चुका है. राज्य की धरती पर हर साल औसतन चार से पांच लाख बार आसमानी बिजली गिरती है.
ये जिले हैं डेंजर जोन में
झारखंड के कई जिले वज्रपात की सघनता ने रेड लाइन पार कर ली है, जिसमें चतरा, पलामू, हजारीबाग और लोहरदगा शामिल हैं. इन जिलों के आसमान में मौत हर वक्त मंडराती रहती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, प्री-मानसून और मानसून के आगमन के समय यानी जून और जुलाई के महीने झारखंड के लिए सबसे ज्यादा घातक साबित होते हैं.
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आखिर छोटानागपुर के पठार पर ही क्यों गिरती है आसमानी बिजली?
• खनिजों की प्रचुरता (मैग्नेटिक अट्रैक्शन): छोटानागपुर का पठारी क्षेत्र समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है. सबसे बड़ा कारण यह है कि झारखंड की मिट्टी में लौह अयस्क सहित कई अन्य धात्विक खनिजों का अकूत भंडार है. मिट्टी में मौजूद ये खनिज तत्व आसमान में बनने वाले चार्ज (बिजली) को चुंबक की तरह तेजी से अपनी ओर आकर्षित करते हैं.
• जंगलों का विनाश और कंक्रीट का जाल: पहले ऊंचे पेड़ आकाशीय बिजली को सोखकर सीधे जमीन के अंदर कर देते थे, जिससे इंसानी बस्तियां सुरक्षित रहती थीं. लेकिन अब ऊंचे पेड़ों के खत्म होने से यह बिजली सीधे इंसानों और खुले में चर रहे मवेशियों पर गिर रही है.
