Ranchi: झारखंड की कथित चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा ने हेमंत सरकार और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर तीखा हमला बोला है. भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने कहा कि राज्य के सरकारी अस्पताल खुद “आईसीयू” में है, जबकि सरकार विकास और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों का ढोल पीटने में लगी हुई है. राफिया नाज ने कहा कि झारखंड में मरीज बीमारी से कम और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली से ज्यादा परेशान हैं. अस्पतालों में न दवाएं हैं, न जांच की समुचित व्यवस्था, न पर्याप्त बेड, न स्ट्रेचर और न ही समय पर एम्बुलेंस. हालत यह है कि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले गरीब मरीजों को हर कदम पर अपमान और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है.

यह भी पढ़ें: BREAKING: गृह मंत्रालय ने जारी की IPS अधिकारियों की कैडर सूची, झारखंड को मिले छह नए आईपीएस
एमजीएम अस्पताल की घटना का जिक्र कर सरकार को घेरा
उन्होंने जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक पिता को अपने मासूम बेटे का शव गोद में उठाकर अस्पताल से बाहर निकलना पड़ा. सरकार को बताना चाहिए कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अस्पतालों में शव वाहन और स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान बन चुकी है. कभी थैले में शव ले जाने की तस्वीरें सामने आती हैं, कभी गर्भवती महिलाओं को खाट पर ढोकर अस्पताल पहुंचाया जाता है, तो कभी एक बेड पर दो मरीजों का इलाज होता है और कभी मोबाइल व टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन. ऐसे दृश्य पूरे राज्य को शर्मसार कर रहे हैं.
भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को निशाने पर लिया
उन्होंने कहा कि राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स भी गंभीर संकट से गुजर रहा है. स्वास्थ्यकर्मी वेतन के लिए आंदोलन कर रहे हैं, मरीजों को जरूरी जांच और दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है. सवाल यह है कि जब राजधानी का सबसे बड़ा अस्पताल ही बदहाल है तो दूरदराज के अस्पतालों की स्थिति कितनी भयावह होगी. राफिया नाज ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी तो खूब करते हैं, लेकिन अस्पतालों की जमीनी हकीकत पर उनकी चुप्पी हैरान करने वाली है. यदि मंत्री अपने विभाग के प्रति जवाबदेह होते तो मरीजों को इलाज के लिए इस तरह दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़तीं.
यह भी पढ़ें: 15 जून तक शत-प्रतिशत मैपिंग का लक्ष्य, अधिकारियों ने दिए जरूरी निर्देश
झारखंड की जनता अब भाषण नहीं, इलाज चाहती है: राफिया नाज
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के हेल्थ कियोस्क शोपीस बन चुके हैं, अस्पतालों में हजारों पद खाली हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर नहीं हैं और कई अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं. सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है. भाजपा ने मांग की है कि रिम्स, एमजीएम समेत सभी सरकारी अस्पतालों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, स्वास्थ्यकर्मियों के लंबित वेतन का तत्काल भुगतान हो, दवा और जांच सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए तथा स्वास्थ्य व्यवस्था की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और सरकार की जवाबदेही तय की जाए. राफिया नाज ने कहा कि झारखंड की जनता अब भाषण नहीं, इलाज चाहती है. जनता को विज्ञापन नहीं, अस्पतालों में व्यवस्था चाहिए. सरकार को यह समझना होगा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर राजनीति नहीं, जवाबदेही चाहिए और जनता इसका हिसाब जरूर मांगेगी.
