रैयतों के विरोध के आगे DVC बेबस, फटी पाइप लाइनों की मरम्मत फिर टली

Bokaro: बेरमो अनुमंडल अंतर्गत बोकारो थर्मल के निशन हाट पुलिया से मुर्गी फार्म खटाल के बीच डीवीसी ऐश पोंड को जाने वाली...

Bokaro: बेरमो अनुमंडल अंतर्गत बोकारो थर्मल के निशन हाट पुलिया से मुर्गी फार्म खटाल के बीच डीवीसी ऐश पोंड को जाने वाली पाइपलाइन के मरम्मत का कार्य सोमवार को एक बार फिर शुरू नहीं हो सका. बेरमो एसडीएम मुकेश मछुआ द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी, स्थानीय थाना की पुलिस, होमगार्ड के जवान और डीवीसी के सैकड़ों इंजीनियरों, अधिकारियों एवं कामगारों की मौजूदगी के बावजूद गोविंदपुर के रैयतों और विस्थापितों के विरोध के कारण टीम को बैरंग लौटना पड़ा.

चार पाइपलाइन पहले से हैं क्षतिग्रस्त

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऐश पोंड को जाने वाली पांच पाइपलाइनों में से चार पिछले छह महीने से लेकर डेढ़ वर्ष से क्षतिग्रस्त हैं. गोविंदपुर के रैयतों के विरोध के चलते प्रबंधन इन्हें बदलने या मरम्मत करने में असमर्थ है. फिलहाल केवल पाइपलाइन संख्या-2 के सहारे ही ऐश स्लरी का निष्पादन हो रहा है.

बिजली उत्पादन पर मंडरा रहा संकट

यदि वर्तमान में संचालित पाइपलाइन संख्या-2 भी किसी कारणवश क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो 500 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांट को बंद करना पड़ सकता है. इससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

जमीन और नियोजन बना विवाद की जड़

विवाद की मुख्य वजह पाइपलाइन की जमीन पर अधिकार और स्थानीय लोगों की नियोजन संबंधी मांग है. लगभग 15 वर्ष पूर्व डीवीसी ने सीसीएल बोकारो-करगली प्रबंधन से मौखिक समझौते के आधार पर इस जमीन पर पाइपलाइन बिछाई थी. बाद में पाइपलाइन फटने से खेतों में ऐश स्लरी फैलने की घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने मुआवजा और 30 लोगों को नौकरी देने की मांग उठाई थी.

वादे पूरे नहीं होने से ग्रामीण नाराज

ग्रामीणों का आरोप है कि कई दौर की वार्ता के बाद प्रबंधन ने केवल आठ लोगों को विभिन्न कंपनियों में काम दिया था, जिनमें से भी तीन लोगों को हटा दिया गया. शेष लोगों को नियोजन नहीं मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है.

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दो घंटे तक चला गतिरोध

सोमवार को डीवीसी के जीएम सोमेन मंडल, नरेश मुरस्कर, डीजीएम तीताबर रहमान, सुरजीत सिंह, शैलेंद्र कुमार, अभिजीत दुले, वरीय प्रबंधक एचआर पार्थ सारथी मुखर्जी समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, इंजीनियर और कामगार जेसीबी मशीन, पाइप और अन्य संसाधनों के साथ कार्यस्थल पहुंचे. उनके साथ प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी घनश्याम रजक, सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस बल भी मौजूद था.

ग्रामीणों ने रखी दो टूक शर्त

सूचना मिलते ही ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए. फलेंद्र महतो, जलेश्वर महतो, संजय महतो, भोला महतो और चंदू महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक डीवीसी जमीन के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता और पूर्व में किए गए वादे के अनुसार 30 लोगों को नियोजन नहीं देता, तब तक पाइपलाइन बदलने का कार्य नहीं होने दिया जाएगा.

जमीन को लेकर दोनों पक्षों के दावे

मौके पर मौजूद दंडाधिकारी ने कहा कि पाइपलाइन की जमीन को लेकर डीवीसी प्रबंधन और गोविंदपुर के रैयतों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन कोई भी पक्ष दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर रहा है. उन्होंने सुझाव दिया कि बेरमो सीओ की मौजूदगी में दोनों पक्ष कागजात के साथ बैठकर विवाद का समाधान करें.

DVC ने जमीन पर जताया दावा

डीवीसी के भू-संपदा पदाधिकारी सह वरीय प्रबंधक सुरजीत सरकार ने कहा कि प्रबंधन ने अमीन से जमीन की मापी कराई है. मापी के अनुसार जिन स्थानों पर विवाद है, उनमें अधिकांश जमीन डीवीसी की है, जबकि कुछ हिस्सा सीसीएल की अधिग्रहित भूमि में आता है. इसके बावजूद रैयत विरोध कर रहे हैं.

बिना समाधान लौट गई टीम

लगभग दो घंटे तक चली बातचीत, खींचतान और हंगामे के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल सका. अंततः डीवीसी की पूरी टीम बिना मरम्मत कार्य शुरू किए वापस लौट गई. इस गतिरोध ने अब सीधे तौर पर बिजली उत्पादन के समक्ष बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. डीवीसी अधिकारियों का कहना है कि यदि पाइपलाइन संख्या-2 भी क्षतिग्रस्त हो जाती है और पावर प्लांट बंद करना पड़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी गोविंदपुर के रैयतों पर होगी.

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