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एसआईटी की जांच में आया सामने– कैश में बदलते ही गायब हुआ पैसा.
Ranchi: चर्चित ट्रेजरी घोटाले में अब जांच का फोकस मनी ट्रेल से हटकर एसेट अटैचमेंट पर जाता दिख रहा है. पिछले तीन दिनों में रिमांड पर आए 12 आरोपियों से सीआईडी की एसआईटी की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि करीब 45 करोड़ रुपये की अवैध निकासी में से लगभग 40 करोड़ रुपये आरोपियों द्वारा खर्च कर दिए गए. इस खुलासे ने जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब सीधे पैसे की रिकवरी संभव नहीं, बल्कि संपत्तियों की पहचान और कुर्की ही मुख्य रास्ता बचा है.

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कैश में बदला और खत्म हो गया ट्रेल
एसआईटी की पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने रकम को सीधे अपने खातों में रखने के बजाय दर्जनों खातों में ट्रांसफर किया और तुरंत कैश निकाल लिया. बैंकिंग सिस्टम से पैसा निकलते ही डिजिटल ट्रेल लगभग खत्म हो गया. कैश ट्रांजैक्शन के कारण वास्तविक उपयोग का पता लगाना मुश्किल हो गया. यह पूरी साजिश “लेयरिंग” और “इंटीग्रेशन” के तरीके पर आधारित थी, जो आमतौर पर मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होता है.
बेनामी संपत्तियों में खपाया गया पैसा
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि निकाली गई राशि का बड़ा हिस्सा रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर जमीन-फ्लैट खरीदने में, सोना और अन्य महंगी संपत्तियों में, लग्जरी गाड़ियों और निजी शौक पूरे करने में खर्च किया गया. इस वजह से फिजिकल कैश रिकवरी लगभग नामुमकिन मानी जा रही है.
अब तक क्या रिकवर/फ्रीज हुआ
हालांकि एसआईटी ने अब तक कार्रवाई करते हुए करीब 3 करोड़ 9 लाख 86 हजार रुपये फ्रीज किए हैं. कई बैंक खातों, एफडी और संपत्तियों को चिन्हित किया है. कुछ जमीन और मकान के कागजात जब्त किए हैं. लेकिन यह राशि कुल घोटाले की तुलना में बेहद कम है.
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अब ईडी की एंट्री से बदलेगा खेल
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ईसीआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. अब संभावना है कि ईडी की जांच में कुछ बड़ी कार्रवाई हो सकती है. क्योंकि ईडी के पास ऐसे मामलों में ज्यादा शक्तियां होती हैं. पीएमएलए के तहत संपत्तियों की तत्काल कुर्की हो सकती है. बिना वारंट गिरफ्तारियां और “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” के रूप में बेनामी संपत्तियों को जब्त भी आगे किया जा सकता है.
