Ranchi: झारखंड सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों की गोपनीयता रिपोर्ट और चल-अचल संपत्ति के ब्योरे को भी ट्रैक कर रही है. कर्मचारी एसीआर, एपीआर, डीपीडी सबमिशन स्टेटस रिपोर्ट’ के माध्यम से राज्य के तमाम क्लास वन और क्लास टू अधिकारियों पर सीधे नजर रखी जा रही है कि वे अपनी वार्षिक संपत्ति का विवरण समय पर दे रहे हैं या नहीं. सख्त ऑनलाइन मॉनिटरिंग का ही नतीजा है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद समय पर अपनी वार्षिक संपत्ति का विवरण और वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट दाखिल करने वाले अधिकारियों की संख्या में 40% का भारी उछाल दर्ज किया गया है. जो अधिकारी पहले अपनी संपत्ति छुपाने या लेट करने के बहाने ढूंढते थे, अब वे खुद आगे बढ़कर डेटा सबमिट कर रहे हैं.
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सेवानिवृत्ति ट्रैकिंग: 98% बुजुर्ग कर्मचारियों को पहले ही दिन मिलेगी पेंशन
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद कर्मचारियों को अपनी ही गाढ़ी कमाई (पेंशन और ग्रेच्युटी) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं. इस मानवीय संकट को भी दूर कर दिया है. ‘निकास कर्मचारी विवरण रिपोर्ट के जरिए अगले 6 महीनों के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का डेटा पहले ही ‘सत्यापित’ श्रेणी में डाल दिया जाता है.
जानिए विभागों का हाल
• कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग: विभाग के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों के ई-सेवा पुस्तिका प्रपत्रों की प्रविष्टि को प्राथमिकता के आधार पर 90% से अधिक पूरा कर लिया गया है.
• वित्त विभागः राज्य के 92% से अधिक आहरण-वितरण पदाधिकारियों (डीडीओ) और स्थापना प्रभारियों के विवरण को लाइव लिंक कर दिया गया है ताकि वेतन निकासी में कोई तकनीकी बाधा न आए.
• गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग: पुलिस और जेल प्रशासन से जुड़े इस विशाल विभाग में कर्मचारियों की संख्या अत्यधिक होने के कारण शुरुआती दौर में डेटा लॉकिंग की गति धीमी थी, जिसे अब विशेष अभियान चलाकर 82% तक पहुंचा दिया गया है.
• स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग: प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के 88% से अधिक शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का डेटा पूरी तरह लॉक किया जा चुका है. लगभग 12% डेटा अब भी ‘संबद्ध विभाग’ स्तर पर सत्यापन के लिए लंबित (पेंडिंग) पाया गया है, जिसे दुरुस्त करने के लिए टाइम-बाउंड अल्टीमेटम दिया गया है.
• स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं कल्याण विभाग: डॉक्टरों, नर्सों इसेंसिटव और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए तैनाती विभाग वार पदनाम मैट्रिक्स रिपोर्ट के तहत 95% स्वीकृत पदों का मिलान लाइव कार्यरत कर्मचारियों से कर दिया गया है. इस डेटाबेस से राज्य में बिना स्वीकृत पद के सालों से एक ही जगह जमे स्वास्थ्य कर्मियों के मामलों में 100% कमी आने का अनुमान है.
• ग्रामीण विकास एवं पथ निर्माण विभाग: मूल विभाग से इतर दूसरे तकनीकी विंग में प्रतिनियुक्ति पर चल रहे 78% इंजीनियरों और अधिकारियों की सेवा पुस्तिका को ऑनलाइन ट्रैक कर लिया गया है, जिससे अवैध प्रतिनियुक्ति का खेल खत्म होगा.
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