Koderma: जयनगर थाना क्षेत्र के नईटांड पंचायत अंतर्गत रघुनियाडीह गांव स्थित मदरसा जामिया फातमा लिलबनात मंगलवार को उस समय विवादों के केंद्र में आ गया, जब जमीन और संचालन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अचानक उग्र हो गया. देखते ही देखते मदरसा परिसर में सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण बन गया. हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा. कई घंटों तक चले हंगामे, विरोध और नोकझोंक के बाद पुलिस ने मदरसा में ताला जड़ दिया तथा पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2007 में स्थानीय लोगों और आवाम के सहयोग से बच्चियों की शिक्षा के उद्देश्य से मदरसा जामिया फातमा लिलबनात की स्थापना की गई थी. यहां उर्दू के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी की भी शिक्षा दी जाती थी. ग्रामीणों का कहना है कि मदरसा के संचालन की जिम्मेदारी नईटांड निवासी एवं वर्तमान में हजारीबाग में रहने वाले मुफ्ती महबूब को सौंपी गई थी. कई वर्षों तक संस्थान सुचारू रूप से संचालित होता रहा, लेकिन करीब दो वर्ष पूर्व जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद शुरू हो गया. ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर मदरसा संचालित हो रहा है, उसे संस्था या मदरसा कमेटी के नाम पर दर्ज कराने के बजाय व्यक्तिगत नाम पर करा ली गई. इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है. कई बार थाना और प्रशासनिक स्तर पर समझौते के प्रयास भी किए गए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया.
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क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व दोनों पक्ष अंचल कार्यालय पहुंचे थे, जहां अंचल अधिकारी ने सामाजिक स्तर पर बातचीत कर विवाद सुलझाने की सलाह दी थी. ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद विवाद का हल निकालने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई. मंगलवार को ग्रामीण इस मुद्दे को लेकर अंचल कार्यालय जाने की तैयारी कर रहे थे. इसी बीच संचालक पक्ष से जुड़े शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मदरसा परिसर पहुंचे और वहां लगे ताले को तोड़कर अंदर प्रवेश कर गए. ताला तोड़े जाने की खबर फैलते ही गांव में आक्रोश फैल गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवक मदरसा परिसर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. ग्रामीणों का कहना था कि जब मामला प्रशासन के समक्ष विचाराधीन है और समाधान की प्रक्रिया चल रही है, तो आखिर किसकी अनुमति से ताला तोड़कर मदरसा खोला गया. ग्रामीणों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ताला टूटने के कुछ ही मिनटों के भीतर पुलिस मौके पर पहुंच गई, जिससे कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं. स्थिति लगातार बिगड़ती देख जयनगर पुलिस हरकत में आई और भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर भेजा गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मुख्यालय अरविंद कुमार, अंचल अधिकारी सारांश जैन, इंस्पेटर सुजीत कुमार, थाना प्रभारी विकास कुमार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पहुंचे. लगभग दो घंटे तक ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तीखी बहस और नोकझोंक होती रही. ग्रामीणों की मांग थी कि मदरसा के भीतर मौजूद शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को बाहर निकाला जाए और पुनः कमेटी का ताला लगाया जाए. काफी मशक्कत और समझाइश के बाद पुलिस ने मदरसा परिसर के अंदर मौजूद शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को बाहर निकाला. हालांकि इसके बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही. भीड़ को नियंत्रित करने तथा शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद प्रशासन ने स्वयं मदरसा में ताला जड़ दिया और घोषणा की कि जमीन एवं स्वामित्व विवाद का समाधान होने तक मदरसा बंद रहेगा. घटना के बाद पूरे रघुनियाडीह और मदरसा के आसपास में तनाव का माहौल बना हुआ है. किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मदरसा परिसर और आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. मुख्यालय डीएसपी अरबिंद कुमार ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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