नहीं रहे जसपाल राणा: भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और स्टार खिलाड़ी जसपाल राणा का निधन, शोक की लहर

Jaspal Rana is no more: शुक्रवार, 12 जून का दिन दुखद खबर लेकर आया. भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और स्टार खिलाड़ी...

Jaspal Rana is no more: शुक्रवार, 12 जून का दिन दुखद खबर लेकर आया. भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और स्टार खिलाड़ी रहे जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया. जसपाल 49 साल के थे. हाल ही में म्यूनिख विश्व कप हुआ तो वहीं पर उनकी थोड़ी तबीयत बिगड़ी. म्यूनिख से जब वह भारत आ रहे थे तो फ्लाइट में ही उन्हें थोड़ी बैचेनी महसूस हुई. उनकी फ्लाइट में ही तबीयत खराब हुई. जब वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे तो सीधे उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. अस्पताल में इलाज के दौरान उनको स्टैंट पड़ा और उनकी तबीयत थोड़ी संभली थ.। वह बात करने की स्थिति में भी आ गए थे. परिवार के सदस्य ने बताया कि उन्हें दूसरा स्टैंट भी डाला जाना था क्योंकि कुछ और ब्लॉकेज थी. उसमें ही कुछ दिक्कत आई और तबीयत बिगड़ी तथा उनका निधन हो गया. जसपाल राणा का दुनिया से जाना सभी निशानेबाजों के लिए बड़ी क्षति है, विशेषकर जो बच्चे उनके नेतृत्व में ट्रेनिंग करते थे, उनके लिए बड़ी क्षति है.

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जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों में जीता था गोल्ड

भारत को अगर निशानेबाजी में कोई जानता है तो उसमें जसपाल राणा को बहुत बड़ा योगदान है. जसपाल राणा ने 1994 में पहली बार हिरोशिमा में एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता था और उसी वर्ष राष्ट्रमंडल खेल में भी उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते. इसके बाद एकदम से सनसनी फैली थी कि ये कैसा खेल है जिसमें हम पदक जीत सकते हैं. हालांकि, अभिनव बिंद्रा ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में देश को पहला ओलंपिक स्वर्ण दिलाया, लेकिन अगर देश में निशानेबाजी का नाम स्थापित हुआ तो उसमें जसपाल राणा का सबसे बड़ा योगदान है. जसपाल राणा की वजह से ही देश में निशानेबाजी स्थापित हुई. आज भारत जो इस खेल में इतना मजबूत देश बना है, इसकी बहुत बड़ी वजह जसपाल राणा हैं.

मशहूर कोच, मनु भाकर को दे रहे थे ट्रेनिंग

जसपाल एक बेहतरीन निशानेबाज तो थे ही, लेकिन जब उन्होंने निशानेबाजी करियर से संन्यास लिया तो भी जसपाल ने निशानेबाजी को छोड़ा नहीं. जूनियर बच्चों को उन्होंने ट्रेनिंग देने की एक मुहिम छेड़ी. इस मुहिम में जसपाल बहुत की ज्यादा सफल हुए. जसपाल इस वक्त भारतीय निशानेबाजी टीम के कोच थे और इस वर्ष एशियाई खेल का भी आयोजन होना है. मनु भाकर समेत कई बड़े खिलाड़ियों को वह ट्रेनिंग दे रहे थे. मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में जो दो पदक जीते, उसमें जसपाल राणा का बहुत बड़ा योगदान है. सौरभ चौधरी हों या मनु भाकर, अनीश भानवाला और हाल ही में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली ईशा सिंह को भी उन्होंने ट्रेनिंग दी. जसपाल राणा का इस तरह दुनिया से जाना निशानेबाजी के लिए बहुत ही बड़ी क्षति है. निशानेबाजी जगत के लिए इससे बड़ी क्षति कुछ हो नहीं सकती है. उनके जाने से देश में शोक की लहर दौड़ गई.

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राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स पर लिखा, जसपाल राणा जी के निधन की खबर बहुत दुखद है. वह एक जाने-माने निशानेबाज थे, जिनके शानदार प्रदर्शन ने देश का नाम रोशन किया. कई वैश्विक प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले राणा ने खुद को भारतीय खेलों के एक आइकॉन के तौर पर स्थापित किया. एक एथलीट और मेंटर के तौर पर उन्होंने युवा टैलेंट को निखारकर योगदान दिया. उनका समर्पण, अनुशासन और बेहतरीन काम करने की प्रतिबद्धता आने वाली कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेगी. मैं उनके परिवार, दोस्तों और खेल समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जसपाला राणा के निधन पर गहरा शोक जताया. मोदी ने एक्स पर लिखा, जसपाल राणा जी के निधन से गहरा दुख हुआ है. उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाया. एक मेंटर के तौर पर भी उनका योगदान बहुत अहम रहा. उन्होंने पूरी लगन से युवा खिलाड़ियों को तराशा और उनका मार्गदर्शन किया. बेहतरीन प्रदर्शन, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें बहुत सम्मान मिला. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और पूरे खेल जगत के साथ हैं. ओम शांति.

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