Hazaribagh : हजारीबाग सदर अस्पताल एवं शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. चोरहेटा निवासी सुषमा कुमारी (पति- रोहित राम) की प्रसव के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अस्पताल की कार्यशैली और व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है. घटना बिती रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है. परिजनों का आरोप है कि गर्भावस्था के दौरान सुषमा कुमारी को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन इसके बाद उचित चिकित्सकीय देखभाल और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया.
मां की मौत, नवजात के सिर से उठा ममता का साया
सुषमा कुमारी की मौत के साथ ही एक नवजात ने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उनका आरोप है कि यदि अस्पताल प्रबंधन और चिकित्साकर्मियों ने समय रहते गंभीरता दिखाई होती तो सुषमा की जान बचाई जा सकती थी.
घटना के बाद गायनी वार्ड से नर्स गायब, 10 घंटे तक मरीज भगवान भरोसे
घटना के बाद अस्पताल की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई. आरोप है कि गायनी वार्ड में तैनात नर्स घटना के बाद वार्ड छोड़कर चली गई और रात 2 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रसूता महिलाओं को देखने वाला कोई नहीं था. वार्ड में भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों ने बताया कि कई मरीज दर्द से कराहते रहे, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था. दवा, जांच और सामान्य देखभाल तक के लिए मरीजों के परिजन इधर-उधर भटकते रहे।
वार्ड में खून पसरा रहा, गंदगी और बदबू से मरीज परेशान
घटना के कई घंटों बाद तक गायनी वार्ड में सफाई नहीं कराई गई. वार्ड के विभिन्न हिस्सों में खून के धब्बे और चिकित्सकीय कचरा पड़ा रहा. गंदगी और बदबू के कारण मरीजों और उनके परिजनों का वार्ड में रहना मुश्किल हो गया. अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण संस्था में इस प्रकार की स्थिति बेहद शर्मनाक है. स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के सभी दावे यहां खोखले नजर आ रहे हैं.
सदर विधायक प्रदीप प्रसाद पहुंचे अस्पताल, प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर विधायक प्रदीप प्रसाद अस्पताल पहुंचे और गायनी वार्ड का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने वार्ड में फैली गंदगी, अव्यवस्था और मरीजों की समस्याओं को देखा. विधायक ने अस्पताल प्रबंधन पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज देने के बजाय व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है.
आउटसोर्सिंग व्यवस्था ने बिगाड़ी स्वास्थ्य सेवा
विधायक ने आरोप लगाया कि अस्पताल में बड़ी संख्या में नर्सों की बहाली आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से की गई है. इनमें कई कर्मियों के अनुभव और योग्यता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि बहाली प्रक्रिया और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर तथ्य सामने आ सकते हैं. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियां महीनों तक कर्मचारियों का वेतन रोककर रखती हैं, जिससे कार्य संस्कृति प्रभावित हो रही है.
‘उगाही के बिना मरीजों को नहीं मिलता समुचित सहयोग’
अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों और परिजनों ने आरोप लगाया कि कई बार बिना पैसे दिए मरीजों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता. विधायक ने भी कहा कि वे लगातार ऐसी शिकायतें सुन रहे हैं कि कुछ कर्मी मरीजों की सेवा के बजाय अवैध वसूली में अधिक रुचि दिखाते हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जांच और जवाबदेही की उठी मांग
सुषमा कुमारी की मौत के बाद परिजन, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सकीय लापरवाही या प्रशासनिक चूक सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
एक ओर सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला रही हैं. एक मां की मौत, वार्ड में पसरी अव्यवस्था, नर्सों की अनुपस्थिति और मरीजों की बदहाली ने हजारीबाग सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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