Dhanbad : प्रशासन के गलियारों में जब साहेब की भाषा आम जनता की समझ से दूर हो जाए तो न्याय की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं. लेकिन धनबाद कलेक्ट्रेट में इसके उलट एक बेहद संवेदनशील और दिल को छू लेने वाला नजारा देखने को मिला.जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर पहुंची एक ग्रामीण आदिवासी महिला जब अपनी बात हिंदी में नहीं रख पाई तो धनबाद डीसी आदित्य रंजन ने खुद स्थानीय खोरठा भाषा में संवाद किया. डीसी ने न सिर्फ महिला का दर्द समझा बल्कि तुरंत एक्शन का आदेश भी दिया.
महिला के छलक पड़े आंसू
दरअसल, तोपचांची थाना क्षेत्र के मानपुर (झगड़ाही) गांव की रहने वाली सावित्री देवी डीसी के समक्ष अपनी गुहार लगाने पहुंची थीं. वह पढ़ी-लिखी नहीं थीं और कलेक्ट्रेट के माहौल और हिंदी भाषा के दबाव में अपनी बात कहने में हिचकिचा रही थी. महिला की इस बेबसी को भांपते हुए धनबाद डीसी ने संवेदनशीलता दिखाई. उन्होंने तुरंत स्थानीय खोरठा भाषा में महिला से बातचीत शुरू की. डीसी के मुंह से अपनी माटी की बोली सुनते ही सावित्री देवी के आंसू छलक पड़े भाषा की दीवार ढहते ही उन्होंने खोरठा में ही अपनी पूरी आपबीती कह सुनाई.

जल्द कार्रवाई कर रिपोर्ट देने का आदेश
खोरठा में पूरी दास्तां सुनने के बाद डीसी ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया.उन्होंने मौके से ही तोपचांची अंचल अधिकारी को इस पूरे मामले की गहन जांच करने और जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया. डीसी ने पीड़िता को आश्वस्त किया कि किसी भी गरीब की जमीन पर रसूखदारों का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. धनबाद डीसी के इस जन-सुलभ अंदाज़ और स्थानीय भाषा के प्रति सम्मान ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया. एक बेसहारा महिला को न सिर्फ अपनी बात रखने का मंच मिला बल्कि अपनी ही भाषा में न्याय का पक्का भरोसा भी मिला.


