Ranchi: झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024′ (Jharkhand Private Universities Act, 2024) के कार्यान्वयन को लेकर दायर रिट पिटीशन की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पूर्व में निजी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि एवं महाधिवक्ता के बीच नियमन के विरोध एवं सहमति पर वार्तालाप हुई थी, जिसका मिनट टू मिनट रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया. अदालत ने अब इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि अधिनियम के विरोध में आए विश्वविद्यालय के सुझाव एवं विकल्प पर राज्य सरकार का क्या मंतव्य है? इस पर जवाब दाखिल करें. मामले में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. अगली सुनवाई 1 सप्ताह बाद होगी.
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झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के कई प्रावधानों का हो रहा है विरोध
बता दें कि झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024 के तहत निजी विश्वविद्यालयों को 15 दिनों के भीतर 1 करोड़ रुपये का भारी लाइसेंस शुल्क (License Fee) जमा करने का प्रावधान किया गया था. इसके अलावा कई नियम जोड़े गए थे जैसे- वाइस चांसलर की नियुक्ति, संचालकों के शैक्षणिक योग्यता, विजिलेटर के मुद्दे शामिल हैं, इन प्रावधानों का निजी विश्वविद्यालय विरोध कर रहा है. झारखंड उच्च न्यायालय ने जनवरी 2025 में ‘झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024’ (The Jharkhand Private Universities Act, 2024) के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी जो अब तक जारी है. मामले में राज्य सरकार एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों की ओर से दलीलें पेश की जा रही है. मामले में प्रार्थी के रूप में सरला बिरला यूनिवर्सिटी, संध्या शंभू एजुकेशनल ट्रस्ट, राधा गोविंद यूनिवर्सिटी रामगढ़, सोना देवी मेमोरियल एजुकेशन फाउंडेशन ट्रस्ट, वनांचल एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट, रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफेयर ट्रस्ट, सैनाथ यूनिवर्सिटी, शिवम ट्रस्ट शामिल हैं.
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