Hazaribagh : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य को तेजी से पूरा किया गया, लेकिन इस योजना को धरातल पर उतारने वाले संवेदक अब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. जिले के पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के अंतर्गत कार्य करने वाले करीब 85 समूहों के संवेदकों का आरोप है कि तीन वर्षों से उनका करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है. समय पर राशि नहीं मिलने के कारण कई संवेदक बैंक के कर्ज की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं और अब उनके बैंक डिफॉल्टर बनने के साथ-साथ गिरवी रखी संपत्तियों की नीलामी का खतरा मंडराने लगा है.
योजना पूरी, लेकिन भुगतान नहीं
संवेदकों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने, जलमीनार निर्माण, पेयजल आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने समेत अन्य सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे कर विभाग को सौंप दिए गए. इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं किया गया. उनका आरोप है कि विभागीय कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने के बाद भी केवल आश्वासन मिल रहा है, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं. संवेदकों के अनुसार योजना शुरू करने के लिए उन्होंने बैंकों से ऋण लिया, अपनी निजी पूंजी लगाई और कई लोगों ने घर तथा जमीन तक गिरवी रख दी. अब किस्त जमा नहीं होने से बैंक लगातार नोटिस भेज रहे हैं और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. ऐसे में संवेदकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. संवेदकों का कहना है कि भुगतान लंबित रहने के बावजूद कई योजनाओं के रखरखाव और तकनीकी खराबियों को दूर करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है. इसके कारण उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है. कई संवेदकों की सिक्योरिटी मनी भी अब तक वापस नहीं की गई है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है.

मजदूरों और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान भी अटका
भुगतान नहीं मिलने से मजदूरों की मजदूरी, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का बकाया और बैंक ऋण का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. संवेदकों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो कई छोटे ठेकेदार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट जाएंगे. तीन वर्षों से लंबित सभी भुगतान तत्काल जारी किए जाएं. संवेदकों की सिक्योरिटी मनी शीघ्र लौटाई जाए. बैंक डिफॉल्टर होने से बचाने के लिए विशेष राहत दी जाए. भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए. संवेदकों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो कई लोग बैंक डिफॉल्टर घोषित हो जाएंगे, उनकी गिरवी रखी संपत्तियों की नीलामी हो सकती है और भविष्य में सरकारी योजनाओं में भाग लेना भी उनके लिए मुश्किल हो जाएगा. उनका कहना है कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना को सफल बनाने वाले संवेदकों की अनदेखी से न केवल उनका भविष्य संकट में है, बल्कि आने वाली विकास योजनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है.


