Koderma: पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease – FMD) के छठे चरण (राउंड-6) के सफल संचालन को लेकर पशुपालन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है. इसी क्रम में जिले के तीन प्रमुख संस्थानों/प्रखंडों (जयनगर, डोमचांच एवं झुमरी तिलैया) में कार्यरत सभी टीकाकर्मियों (Vaccinators) के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. यह प्रशिक्षण संबंधित क्षेत्रों के भ्रमणशील पशुचिकित्सा पदाधिकारियों (TVO) द्वारा दिया गया. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शत-प्रतिशत और गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना है, ताकि मवेशियों को इस घातक बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके.
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
कोल्ड चेन संधारण: पशुचिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा टीकाकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए, कि वैक्सीन की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए फील्ड में ‘कोल्ड चेन’ (सही तापमान) का विशेष ध्यान रखें.

टीकाकरण की सही तकनीक: मवेशियों को सही मात्रा (Dose) और सही तरीके (Route of Administration) से टीका लगाने के व्यावहारिक गुर सिखाए गए.
डिजिटल एंट्री (भारत पशुधन पोर्टल): शत-प्रतिशत पारदर्शिता के लिए टीका लगाने के तुरंत बाद पशु के टैग नंबर के साथ ‘भारत पशुधन’ ऐप/पोर्टल पर रियल-टाइम डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई.
बायो-सिक्योरिटी: एक गांव से दूसरे गांव संक्रमण न फैले, इसके लिए टीकाकर्मियों को स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया.
साथ ही पशुपालन विभाग ने जिले के सभी पशुपालकों से अपील की है, कि जब टीकाकर्मी उनके घर पहुंचें, तो वे अपने गाय-बैल और भैंसों का टीकाकरण अवश्य करवाएं. यह टीका पूरी तरह निःशुल्क है और पशुओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है.
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