Jamshedpur: जमशेदपुर एक बार फिर खून से लाल हो गई है. बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित डीडी बार के बाहर हुई मामूली कहासुनी ने एक ऐसा खूनी रूप अख्तियार किया, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि उन्होंने खाकी का खौफ ताक पर रखकर इस वारदात को अंजाम दिया. घटना में गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह ने इलाज के दौरान टाटा मुख्य अस्पताल में सोमवार को दम तोड़ दिया. वहीं, इस हमले में गंभीर रूप से घायल दूसरे युवक, प्रत्युष सिंह की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है. मृतक हिमांशु सिंह टाटा स्टील के सेवानिवृत्त कर्मचारी और टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व कमेटी सदस्य अशोक सिंह के पुत्र थे. वे मूल रूप से आदित्यपुर के हरिओम नगर के रहने वाले थे. हिमांशु की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में मातम के साथ-साथ भारी जन-आक्रोश फैल गया है.
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पुलिस पीसीआर वैन के सामने ही किया मर्डर
इस पूरी वारदात ने पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है. प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. परिजनों का आरोप है कि जान बचाने के लिए पीड़ित युवक पुलिस की पीसीआर वैन में बैठ गए थे. लेकिन बेखौफ हमलावरों ने पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में दोनों युवकों को पीसीआर वैन से जबरन बाहर खींच लिया. हमलावरों ने पुलिस के सामने ही धारदार हथियार (चापड़) से हिमांशु और प्रत्युष पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. आरोप है कि जब अपराधी सरेआम दोनों युवकों को लहूलुहान कर रहे थे, तब मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे. उन्होंने अपराधियों को रोकने या बीच-बचाव करने की कोई पुख्ता कोशिश नहीं की.

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सड़क पर उतरा जन-आक्रोश, सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
हिमांशु सिंह की मौत की खबर जैसे ही अस्पताल से बाहर आई, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. शहर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया. आक्रोशित जनता का सीधा सवाल है अगर जमशेदपुर के सबसे व्यस्त और वीआईपी इलाकों में पुलिस की अपनी गाड़ी और जवानों के सामने नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? क्या अपराधियों में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?


