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बिहार की सड़कों पर अब पे एंड मूव का दौर: सरकार ने टोल टैक्स वसूलने का किया पुख्ता इंतजाम, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

News Wave Desk: बिहार की सड़कों पर फर्राटा भरने के शौकीन वाहन चालकों को अब अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार...

It's pay and move on Bihar roads: The government has made elaborate arrangements for collecting toll tax, find out how much it will affect your pocket.

News Wave Desk: बिहार की सड़कों पर फर्राटा भरने के शौकीन वाहन चालकों को अब अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार रहना होगा. सम्राट सरकार ने राज्य की सड़क परिसंपत्तियों से राजस्व जुटाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026 को मिली मंजूरी के बाद अब राज्य के स्वामित्व वाली सड़कों, बड़े पुलों और बाईपास पर सफर करना महंगा होने जा रहा है. सरकार का सीधा तर्क है कि सड़कों के रखरखाव और गुणवत्तापूर्ण नेटवर्क को मेंटेन करने के लिए अब यूजर फीस ही एकमात्र स्थायी समाधान है.

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फास्टैग नहीं तो जुर्माना तय

बिहार सरकार ने टोल वसूली की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से हाई-टेक और डिजिटल बनाने का फैसला लिया है. अब टोल प्लाजा पर कैश की कतारें नहीं, बल्कि फास्टैग की गूंज सुनाई देगी. नई नीति में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फास्टैग को प्राथमिकता दी जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि यदि आपके वाहन पर फास्टैग नहीं है, तो आपको सामान्य शुल्क से अधिक राशि चुकानी होगी. साथ ही, ओवरलोडेड वाहनों पर भी अतिरिक्त जुर्माना लिया जाएगा.

दरों का सालाना पुनरीक्षण

इस नई नियमावली का सबसे चौंकाने वाला पहलू टोल दरों का सालाना पुनरीक्षण है. सरकार हर साल इन दरों की समीक्षा करेगी, जिसका मतलब है कि महंगाई के साथ-साथ आपके सफर का खर्च भी हर साल बढ़ता रहेगा. अब टोल की दरें एक बार तय होकर स्थिर नहीं रहेंगी, बल्कि समय और लागत के अनुसार उनमें लगातार बदलाव होता रहेगा. इससे सड़क रखरखाव के लिए तो धन उपलब्ध होगा, लेकिन आम जनता के लिए हर साल बजट का गणित बिगड़ना तय है.

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किसके लिए क्या है रियायत?

सरकार ने मध्यम वर्ग और स्थानीय लोगों के लिए कुछ रियायत भी रखा है. जो लोग नियमित रूप से एक ही रूट पर यात्रा करते हैं, उनके लिए मल्टी-ट्रिप रियायत और रियायती मासिक पास की व्यवस्था की गई है. स्थानीय निवासियों के लिए भी विशेष छूट का प्रावधान किया गया है, ताकि जनता के बीच असंतोष को कम किया जा सके. हालांकि, इन रियायतों का दायरा क्या होगा और इसे पाने के लिए कितनी कागजी कार्रवाई करनी होगी, यह देखना अभी बाकी है. सरकार का दावा है कि इस पूरी वसूली प्रक्रिया में ऑडिट और निगरानी का सख्त पहरा रहेगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी.

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