विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के लिए अधिग्रहित की गई भूमि की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ा कदम उठाया है. जमीन की अवैध रजिस्ट्री और म्यूटेशन के खेल को रोकने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी ने रांची के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों और संबंधित अंचल कार्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. ED ने पत्र लिखकर बड़गाईं और कांके अंचल के कुल पांच विवादित मौजा की भूमि की रजिस्ट्री और म्यूटेशन पर फिलहाल तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा है.

रजिस्ट्री और म्यूटेशन रोकने का निर्देश
ED द्वारा जारी पत्र के मुताबिक, बड़गाईं अंचल के चार प्रमुख मौजा और कांके अंचल के एक मौजा को इस प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है. जिन इलाकों में रजिस्ट्री और म्यूटेशन रोकने का निर्देश दिया गया है, उनमें मोरहाबादी, बरियातू, कोकर, तिरिल, सांगा (कांके अंचल) शामिल हैं. जांच एजेंसी ने जिला अवर निबंधक (रजिस्ट्री ऑफिस) को स्पष्ट रूप से कहा है कि इन चिह्नित मौजा की जमीनों की रजिस्ट्री फिलहाल न की जाए. इसके साथ ही संबंधित अंचलाधिकारियों (CO) को भी निर्देशित किया गया है कि वे इन क्षेत्रों की भूमि से जुड़ा कोई भी म्यूटेशन आवेदन निष्पादित न करें.
जांच जारी
दरअसल, रिम्स अस्पताल के लिए सरकार ने वर्षों पहले बड़ी भूमि अधिग्रहित की थी. लेकिन भू-माफियाओं, दलालों और सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इस अधिग्रहित भूमि की अवैध रूप से खरीद-बिक्री की गई. न सिर्फ नियमों को ताक पर रखकर इसकी रजिस्ट्री की गई, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में इसका म्यूटेशन भी कर दिया गया. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड ACB इस मामले की जांच कर रही है और इस संबंध में कांड संख्या 1/2026 दर्ज की गई है. वहीं ED भी इस पूरे सिंडिकेट की गहनता से जांच कर रही है. एजेंसी को अंदेशा है कि जांच के दौरान भी इस विवादित भूमि की हेराफेरी या बिक्री की कोशिशें की जा सकती हैं, जिससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ होने का खतरा है. इसी को भांपते हुए ED ने यह कड़ा कदम उठाया है.
क्या है असर
मोरहाबादी, बरियातू और कोकर जैसे पॉश इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री पर इस रोक से जहां भू-माफियाओं के सिंडिकेट पर शिकंजा कसता दिख रहा है, वहीं कई वैध और अवैध सौदे भी फिलहाल अटक गए हैं.


