Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सख्ती की गूंज सुनाई दे रही है. राज्य की कानून-व्यवस्था से लेकर विभागीय फाइलों के निपटारे तक, मंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि अब ‘चलता है’ वाली संस्कृति नहीं चलेगी. पुलिस महकमे के कामकाज पर सवाल उठाकर और फाइलों की पेंडेंसी पर लगाम कसकर, उन्होंने सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है.
यह भी पढ़ें: रांची: पूरे राज्य में अब तक 45 फीसदी कम हुई बारिश, सात जिलों में 89 से 60 फीसदी तक कम वर्षापात

पुलिस महकमे में जवाबदेही का सवाल
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि पुलिस किसी भी अधिकारी की ‘निजी संस्था’ नहीं है, बल्कि सरकार के अधीन एक जवाबदेह इकाई है. मंत्री का यह सीधा आरोप है कि पुलिस महकमे में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जिसे सुधारने में मौजूदा नेतृत्व विफल रहा है. उन्होंने पूछा है कि क्या कभी डीजीपी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हमारे जवानों का हाल जानने की जहमत उठाई है. मंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि जवानों की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें स्वयं के स्तर पर जवानों के लिए कूलर की व्यवस्था करनी पड़ी, जो कि असल में पुलिस विभाग का प्राथमिक दायित्व होना चाहिए था. साथ ही, विदेश से मिल रही जनप्रतिनिधियों को धमकियों पर उन्होंने पुलिस की कार्यक्षमता और खुफिया तंत्र की विफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए.
‘फाइलों के अटकाव’ पर एक्शन प्लान
पुलिस व्यवस्था के साथ-साथ वित्त विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार मंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. उन्होंने विभागीय फाइलों को अनावश्यक रूप से लटकाने वाले अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है. राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि वित्त विभाग द्वारा ‘क्वेरी’ करना एक प्रक्रिया है, लेकिन इसे बहाना बनाकर काम रोकने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी.
मंत्री ने एक नई कार्यसंस्कृति की नींव रखते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं:
• फाइल ट्रैकिंग सिस्टम: अब हर फाइल का लेखा-जोखा रखा जाएगा. वे विभाग के सचिव से रिपोर्ट तलब करेंगे कि कौन सी फाइल किस टेबल पर, कितने दिनों से और क्यों लंबित है.
• दोषियों पर कार्रवाई: यदि जांच में पाया गया कि फाइलों को जानबूझकर लटकाया गया है, तो संबंधित अधिकारियों पर सीधी गाज गिरेगी.
• अनुशासनहीनता पर प्रहार: विभागीय पदानुक्रम को तोड़ने वाले अधिकारियों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशाखा पदाधिकारी का सीधे आप्त सचिव को पत्र लिखना प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध है. ऐसी कार्यशैली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी


