Ranchi: राज्य में इस बार मानसून की रफ्तार बेहद सुस्त है, जिससे राज्य के अन्नदाताओं की नींद उड़ गई है. 1 जून से 4 जुलाई के बीच राज्य में मानसून की सामान्य वर्षा का जो आंकड़ा था, उससे काफी कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य भर में अब तक 45 फीसदी कम बारिश हुई है, जो आने वाले दिनों में कृषि कार्यों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
मानसून का प्रदर्शन: जिलेवार बारिश का हाल
मौसम विभाग के मुताबिक, इस अवधि के दौरान राज्य में जहां 226.3 मिलीमीटर(MLM) सामान्य बारिश होनी चाहिए थी, वहां महज 125.6 मिलीमीटर (MLM) बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. अबतक गढ़वा 89%, गोड्डा 82%, कोडरमा 77%, चतरा 72%, पाकुड़ 68%, लोहरदगा 62% और बोकारो 60% में कम बारिश हुई है.

इन जिलों में भी चिंताजनक स्थिति
राज्य के अधिकांश जिले हजारीबाग में 58%, रामगढ़ में 55%, सरायकेला-खरसावां में 58%, पूर्वी सिंहभूम में 53%, गिरिडीह में 51%, देवघर में 50% और पलामू में 49% कम बारिश हुई है. वहीं धनबाद में 42%, साहिबगंज में 41%, गुमला में 39%, लातेहार में 39% और जामताड़ा में 32% कम बारिश हुई है. दुमका में 13% , सिमडेगा में 19% और रांची में 14 फीसदी कम बारिश हुई है.
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खेती पर संकट के बादल
जुलाई का महीना धान की रोपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. लेकिन अब तक की बारिश ने किसानों के माथे पर पसीने की बूंदें ला दी हैं. खेत सूखे पड़े हैं और बिचड़े तैयार करने में भी देरी हो रही है. यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ, तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ सकता है. किसानों को अब बारिश का इंतजार है ताकि समय रहते धान की रोपाई शुरू की जा सके. कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर बारिश का यही ट्रेंड जारी रहा, तो वैकल्पिक फसलों की ओर सोचने के अलावा किसानों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा.


