UP: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे (दान राशि) से जुड़ी कथित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन और निजी खर्चों ने मामले को और गंभीर बना दिया है. पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर मंदिर से जुड़े चढ़ावे के पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया.
15 लाख रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन
पुलिस जांच में आरोपी अविनाश शुक्ला के बैंक खातों और नकद लेन-देन में 15 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध गतिविधियों का पता चला है, जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम उसके पास कैसे आई और क्या इसका संबंध मंदिर के चढ़ावे से है या नहीं. फिलहाल पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, कैश ट्रांजैक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू कर दी है.

गर्लफ्रेंड को ₹2 लाख नकद और महंगा मोबाइल गिफ्ट
मामले में सबसे चर्चित खुलासा यह है कि आरोपी ने अपनी एक महिला मित्र (गर्लफ्रेंड) को करीब 2 लाख रुपये नकद दिए थे. इसके साथ ही उसे एक महंगा मोबाइल फोन भी गिफ्ट किया गया था. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी नकदी उसके पास कहां से आई और क्या यह पैसा किसी अनियमित स्रोत से जुड़ा हो सकता है. इस लेन-देन को मामले का अहम एंगल माना जा रहा है.
भाई का बयान: ड्यूटी के बाद कैश लेकर जाता था
आरोपी के भाई अभिषेक के मुताबिक, अविनाश को कई बार ड्यूटी खत्म होने के बाद नकदी लेकर जाते हुए देखा गया था. जब इस बारे में सवाल किया गया तो वह अक्सर टालमटोल जवाब देता था.परिवार का कहना है कि वह यह कहता था कि “जजमान दर्शन और सेवा के बदले पैसे देते हैं” और इस विषय पर ज्यादा चर्चा न करने की सलाह देता था.
पुलिस की जांच कई एंगल से जारी
अयोध्या पुलिस इस पूरे मामले की हर दिशा में जांच कर रही है। इसमें बैंक खातों की गहन जांच, नकद लेन-देन का सत्यापन, कॉल डिटेल्स और संपर्कों की पड़ताल और पैसे के स्रोत और खर्च का विश्लेषण शामिल हैं . पुलिस का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त
इस घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है. अब दान की गिनती कड़ी निगरानी और सीसीटीवी के तहत की जा रही है. विशेष रूप से तय स्थान पर ही गणना हो रही है. कर्मचारियों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण है. अनावश्यक बातचीत और लंबे ब्रेक पर रोक जैसी व्यवस्था लागू की गई है.
मॉनिटरिंग रूम के कर्मचारी भी सतर्क
मॉनिटरिंग रूम में तैनात कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अपनी जगह नहीं छोड़ सकेंगे. मकसद साफ है कि दान की गिनती में पूरी पारदर्शिता बनी रहे और दोबारा ऐसी घटना न हो. मंदिर समिति ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह मामला अभी जांच के दायरे में है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वास्तव में मंदिर के चढ़ावे में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं. वहीं, सामने आए वित्तीय लेन-देन और निजी खर्चों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.


