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झीलों और पर्यटन के लिए मशहूर हजारीबाग अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर में भी अहम, कई बड़ी जांचों का बना केंद्र

Hazaribagh : अपनी खूबसूरत झीलों, कैनरी हिल, घने जंगलों, वन्यजीवों, शिक्षा संस्थानों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में पहचान रखने...

Hazaribagh :  अपनी खूबसूरत झीलों, कैनरी हिल, घने जंगलों, वन्यजीवों, शिक्षा संस्थानों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में पहचान रखने वाला हजारीबाग पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के कारण भी चर्चा में रहा है. बीते तीन वर्षों में झारखंड एटीएस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और जिला पुलिस ने जिले के अलग-अलग इलाकों में कई कार्रवाई की हैं. इन अभियानों में संदिग्ध आतंकी नेटवर्क, उग्रवादी गतिविधियों और डिजिटल माध्यम से कथित कट्टरपंथ फैलाने के मामलों की जांच की गई है. हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन मामलों का संबंध केवल जांच के दायरे में आए कुछ व्यक्तियों और नेटवर्क से है, न कि पूरे जिले या किसी समुदाय से.

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2023 से 2026 तक कई बड़ी कार्रवाई, डिजिटल जांच पर बढ़ा जोर

नवंबर 2023 में झारखंड एटीएस ने पेलावल क्षेत्र से एक संदिग्ध ISIS समर्थक को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू हुई. अगस्त 2024 में राज्यभर में चलाए गए अभियान के दौरान हजारीबाग के लोहसिंघना क्षेत्र में भी छापेमारी की गई, जहां जांच एजेंसियों ने AQIS से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क की पड़ताल की. दिसंबर 2025 में एनआईए ने पेलावल के अंसार नगर में छापेमारी कर लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए. मार्च 2026 में उरीमारी क्षेत्र में प्रतिबंधित टीएसपीसी संगठन के आठ सक्रिय सदस्यों की गिरफ्तारी के साथ हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब जांच का सबसे बड़ा आधार जंगल या हथियार नहीं, बल्कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैट और डिजिटल फंडिंग जैसे माध्यम बन चुके हैं.

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सतर्कता, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी पर फोकस

हालिया खुफिया इनपुट के बाद झारखंड एटीएस ने संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के लिए सभी जिलों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है.
हजारीबाग पुलिस भी किरायेदार सत्यापन, होटल और लॉज की जांच, साइबर मॉनिटरिंग, संवेदनशील इलाकों में खुफिया नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आतंकी या उग्रवादी नेटवर्क की शुरुआत अक्सर डिजिटल माध्यम और विचारधारा के प्रसार से होती है, इसलिए समय रहते निगरानी और जागरूकता सबसे प्रभावी उपाय है. विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी जिले में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई होने का मतलब यह नहीं होता कि पूरा क्षेत्र संदिग्ध है, बल्कि इसका अर्थ केवल इतना है कि संभावित नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है. आज भी हजारीबाग अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन, शिक्षा और ऐतिहासिक विरासत के लिए देशभर में सम्मानित पहचान रखता है, वहीं बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र और आम नागरिकों की सतर्क भागीदारी को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है.

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