Ranchi: रांची विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर मंगलवार को नया विवाद सामने आया. विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य रोहित कुमार दुबे ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कई अहम मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की. ज्ञापन में उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से कई जरूरी फैसले लंबित हैं, जिसका सीधा असर छात्रों और शोधार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी दिखाई दे रही है. रोहित दुबे ने पीजी कक्षाओं को संबद्ध कॉलेजों से हटाकर विश्वविद्यालय परिसर में चलाने के फैसले पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि इससे दूर-दराज के जिलों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक और आवागमन की अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ेगी. इसलिए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
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विश्वविद्यालय में ‘एक व्यक्ति-एक पद’ नीति लागू करने की मांग
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की सीनेट की बैठक पिछले चार वर्षों से नहीं हुई है, जबकि नियमों के अनुसार वर्ष में दो बार बैठक होना जरूरी है. उन्होंने नियमित सीनेट बैठक कर विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लंबित मामलों का समाधान करने की मांग की. शोध कार्यों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई. उनका कहना है कि चार वर्षों से पीएचडी प्रवेश परीक्षा की अधिसूचना जारी नहीं हुई है, जिससे शोध के इच्छुक छात्र प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने जल्द अधिसूचना जारी करने और शोध में नकल रोकने के लिए Turnitin जैसे प्लेजरिज्म जांच सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने की मांग की. प्रशासनिक सुधारों के तहत उन्होंने विश्वविद्यालय में ‘एक व्यक्ति-एक पद’ नीति लागू करने की मांग की, ताकि सभी योग्य शिक्षकों को समान अवसर मिल सके और व्यवस्था अधिक पारदर्शी बने. ज्ञापन में JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का मुद्दा भी शामिल किया गया. रोहित दुबे ने परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया की CBI या किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने और परिणाम रद्द करने की मांग की.
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