Jamtara: झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के दो दिवसीय सातवें राज्य सम्मेलन का शनिवार को जामताड़ा स्थित J.K. पैलेस में विधिवत शुभारंभ हुआ. सम्मेलन की शुरुआत महासंघ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों द्वारा झंडोत्तोलन से की गई. संरक्षक अर्जून सिंह और अशोक चौधरी समेत कई मुख्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया.
स्थायीकरण, OPS और वेतन विसंगति रहे प्रमुख मुद्दे
सम्मेलन के पहले दिन अनुबंध कर्मियों के स्थायीकरण, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, वेतन विसंगतियों के समाधान तथा कर्मचारी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. मुख्य वक्ता कामरेड राजीव डिमरी ने कहा कि छठे वेतन पुनरीक्षण समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप सभी योग्य वर्ग-4 कर्मियों को वर्ग-3 का दर्जा दिया जाए. साथ ही वर्ग-3 के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पदों पर वरीयता के आधार पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए.

लेबर कोड पर रोक और 25 सूत्री मांगों पर निर्णय की मांग
कामरेड राजीव डिमरी ने चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) पर रोक लगाने, मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर कथित रूप से NRC लागू करने संबंधी आदेश वापस लेने तथा पुरानी पेंशन योजना लागू होने की स्थिति में कर्मचारियों से NPS के तहत काटी गई राशि लौटाने या उसे सामान्य भविष्य निधि (EPF) खाते में समायोजित करने की मांग की. उन्होंने बताया कि महासंघ ने सरकार के समक्ष कर्मचारियों से जुड़ी 25 सूत्री मांगें रखी हैं, जिन पर शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए.
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सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
महासंघ के मुख्य संरक्षक तारणी प्रसाद कामत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां कर्मचारियों और मजदूरों के हित में नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारी समस्याओं और श्रम संहिताओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक पहल करने में विफल रही है. उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया.
24 जिलों और 78 कर्मचारी संगठनों की भागीदारी
राज्य सम्मेलन में झारखंड के सभी 24 जिलों के साथ 78 कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इसके अलावा नई दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों से भी प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए हैं. सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा के साथ संगठन की भावी रणनीति तय की जाएगी.


