Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद और गोविंदपुर में जिला अवर निबंधक और अवर निबंधक के पद पर कार्यरत रहे चार अधिकारियों को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्रवाई और जारी चार्ज मेमो को खारिज कर दिया है. अदालत ने चारों अधिकारियों की रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु को स्पष्ट किया. अदालत ने कहा कि किसी भी निबंधन (रजिस्ट्रेशन) अधिकारी का काम जमीन के विक्रेता के मालिकाना हक (टाइटल) की जांच करना नहीं है. ऐसे में यदि जमीन के पुराने और नए सर्वे खाता या प्लॉट नंबर में कोई अंतर पाया जाता है तो इसके आधार पर अधिकारियों के खिलाफ कदाचार का मामला नहीं बनाया जा सकता. इस मामले की शुरुआत 7 अगस्त 2020 को रमेश कुमार राही नामक व्यक्ति की शिकायत से हुई थी. शिकायत में धनबाद जिला अवर निबंधक कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में जमीन के निबंधन और म्यूटेशन में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया गया था. शिकायत के बाद राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने धनबाद के उपायुक्त (डीसी) को मामले की जांच के निर्देश दिए थे. जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था. अधिकारियों पर आरोप था कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच निबंधित कई दस्तावेजों में पुराने और नए सर्वे खाता-प्लॉट नंबर का मिलान नहीं था. इसके अलावा निबंधन दस्तावेजों के साथ जुड़े कागजातों का संबंधित अंचल कार्यालय से सत्यापन भी नहीं कराया गया था. हालांकि अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इन सभी चारों अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है.



