चाईबासा: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, कहा -सरकार हर मोर्चे पर विफल

Chaibasa: झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को मेघाहातुबुरू स्थित सेल गेस्ट हाउस में पत्रकारों...

बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला

Chaibasa: झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को मेघाहातुबुरू स्थित सेल गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है.

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की

मरांडी ने कहा कि राज्य में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तथा पुलिस अपराध नियंत्रण के बजाय अवैध कोयला और बालू कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में अवैध बालू खनन खुलेआम चल रहा है और इसकी काली कमाई का लाभ सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षित युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी बदहाल हो चुकी है. नेता प्रतिपक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद, मंगल गिलुवा, अजीत सिंह, महेंद्र महाकुंड, श्याम गुप्ता, संजीव सिंह, नीरज राम, कनक मिश्रा, बंटी सरदार, वीरेंद्र मिश्रा, गोपी लागुरी, राजेश करजी, जावेद अख्तर, आसना बिरुवा सहित भाजपा के कई नेता, कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी हो समाज युवा महासभा की केंद्रीय समिति ने राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी के नेतृत्व में बाबूलाल मरांडी को एक स्मरण पत्र सौंपा. स्मरण पत्र में केंद्र सरकार से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की गई. महासभा का कहना था कि इन मांगों को कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. गोपी लागुरी ने कहा कि समाज अपनी भाषा और धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए लगातार संघर्षरत है और केंद्र सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा रखता है. इस दौरान कमल किशोर सिरका, माधव चंद्र कोड़ा, उम्लन हेस्सा, धनुर्जय लागुरी, संतोष पांडा सहित समाज के कई प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

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