हजारीबाग: प्राइवेट नौकरी के साथ आधुनिक खेती का कमाल, दारू के आर्यन ने ड्रैगन फ्रूट से लिखी सफलता की नई कहानी

Hazariabgh: परंपरागत खेती से अलग हटकर आधुनिक कृषि को अपनाने वाले दारू प्रखंड के सुल्तानी रविदास टोला निवासी युवा किसान आर्यन कुमार...

प्राइवेट नौकरी के साथ आधुनिक खेती का कमाल, दारू के आर्यन ने ड्रैगन फ्रूट से लिखी सफलता की नई कहानी

Hazariabgh:  परंपरागत खेती से अलग हटकर आधुनिक कृषि को अपनाने वाले दारू प्रखंड के सुल्तानी रविदास टोला निवासी युवा किसान आर्यन कुमार आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. प्राइवेट नौकरी करने के साथ-साथ उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती में ऐसा मुकाम हासिल किया है कि उनके बागान से निकलने वाले फलों की मांग हजारीबाग ही नहीं, बल्कि कोलकाता तक पहुंच चुकी है.

कोरोना काल में आया विचार, आज बन गया सफल उद्यम

आर्यन बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान उन्हें आधुनिक और लाभकारी खेती करने का विचार आया. इसके बाद वर्ष 2024 में उन्होंने कोलकाता से ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगवाए और करीब दो वर्षों तक पूरी मेहनत और लगन से उनकी देखभाल की. आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और बागान से बेहतर उत्पादन मिल रहा है.

आठ कट्ठा में 18 किस्मों का बागान

आर्यन ने लगभग आठ कट्ठा भूमि में ड्रैगन फ्रूट का बाग तैयार किया है. उनके बागान में 18 अलग-अलग किस्मों के ड्रैगन फ्रूट मौजूद हैं. इनमें पीले और लाल रंग के फल सबसे अधिक लोकप्रिय हैं. बाजार में इनकी कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाती है. इस पूरी परियोजना की शुरुआत उन्होंने करीब तीन लाख रुपये की लागत से की थी.

जैविक तरीके से होती है खेती

आर्यन का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी फल है. इसकी खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता. पौधों की देखभाल जैविक एवं प्राकृतिक खाद से की जाती है, जिससे फल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. अच्छी पैदावार के लिए वे नियमित रूप से पौधों की निगरानी और देखभाल करते हैं.

सरकारी सहयोग मिले तो बढ़ेंगे आधुनिक किसान

प्राइवेट नौकरी के साथ खेती करने वाले आर्यन का मानना है कि यदि सरकार आधुनिक खेती करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता और तकनीकी प्रोत्साहन दे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा खेती को रोजगार का बेहतर माध्यम बना सकते हैं. उनका कहना है कि उनके ड्रैगन फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है और हजारीबाग के अलावा कोलकाता तक इसकी आपूर्ति की जा रही है.

युवाओं के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत

आर्यन की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही योजना के साथ खेती भी लाभदायक व्यवसाय बन सकती है. स्थानीय लोग भी सीधे उनके बागान पहुंचकर ताजे ड्रैगन फ्रूट खरीद रहे हैं. उनकी यह पहल दारू ही नहीं, पूरे हजारीबाग जिले के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और आधुनिक कृषि अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है.

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