News Wave Desk: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और गौरी स्प्रैट की हालिया शादी अब केवल फिल्मी गलियारों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इस पर धार्मिक दृष्टिकोण से भी बहस छिड़ गई है. दरअसल, दोनों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज कर कानूनी रूप से एक-दूसरे को जीवनसाथी चुना है. लेकिन, इस व्यक्तिगत फैसले पर मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना ईफ़राहिम हुसैन का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इस विवाह को धार्मिक नियमों के तराजू में लाकर खड़ा कर दिया है.
शरीयत के नियमों का हवाला
शाही चीफ मुफ्ती मौलाना ईफ़राहिम हुसैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस्लामिक नियमों (शरीयत) के अनुसार, किसी भी मुसलमान पुरुष के लिए किसी गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करना जायज नहीं माना जाता. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई व्यक्ति इस नियम के विपरीत जाकर विवाह करता है, तो वह धार्मिक दृष्टिकोण से गुनहगार की श्रेणी में आता है. मुफ्ती के इस बयान ने साफ कर दिया है कि भले ही देश का कानून इस अंतर्धार्मिक विवाह को पूरी मान्यता देता हो, लेकिन पारंपरिक शरिया कानून के तहत इसे स्वीकार्यता नहीं दी जा सकती.
निजी फैसला और सामाजिक विमर्श
गौरतलब है कि आमिर खान और गौरी स्प्रैट पिछले काफी समय से एक-दूसरे के साथ थे और हाल ही में उन्होंने परिवार की मौजूदगी में बिना किसी पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाज या निकाह के, बेहद सादगी से शादी का रजिस्ट्रेशन कराया था. जहां एक तरफ फैंस और उनके करीबी इस नई शुरुआत के लिए कपल को बधाई दे रहे हैं, वहीं दारुल इफ्ता के इस बयान के बाद यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, देश के प्रगतिशील कानूनों और धार्मिक मान्यताओं के बीच एक नए विमर्श का केंद्र बन गया है.
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