Hazaribagh: जिले के चौपारण प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय इन दिनों किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि एक “बंदर बाबू” की वजह से चर्चा में है. पिछले कई दिनों से यह बंदर रोज कार्यालय पहुंचता है और पूरे परिसर को अपना कार्यक्षेत्र समझकर बेखौफ घूमता है. कभी किसी कर्मचारी के कक्ष में टेबल पर बैठकर फाइलों का मुआयना करता नजर आता है, तो कभी मुख्य द्वार पर इस अंदाज में डेरा जमाता है मानो आने-जाने वाले कर्मियों की हाजिरी ले रहा हो.
यह बंदर काट भी सकता है
कार्यालय में आने वाले फरियादी पहले अपनी समस्या बताते हैं या नहीं, लेकिन बंदर को देखकर जरूर ठिठक जाते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यह बंदर काट भी सकता है, हालांकि अब तक किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद लोगों में डर का माहौल बना हुआ है. कार्यालय में भी बंदर की मौजूदगी चर्चा और ठहाकों का विषय बन गई है. लोग व्यंग्य में कहते हैं, “जब कर्मचारियों की कमी हो, तो शायद सरकार ने बंदर बाबू की ही ड्यूटी लगा दी है.” वहीं कुछ लोग मुस्कुराते हुए कहते हैं, “लगता है बंदर बाबू निरीक्षण पर निकले हैं कि किस टेबल पर कितना काम हो रहा है.”
आम लोगों में आशंका बनी हुई है
विडंबना यह है कि कई दिनों से कार्यालय परिसर में डेरा जमाए इस अनचाहे मेहमान को हटाने के लिए अब तक वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इससे कर्मचारियों और आम लोगों में आशंका बनी हुई है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाए. अब लोगों की मांग है कि वन विभाग जल्द पहल कर बंदर को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर जंगल में छोड़े, ताकि प्रखण्ड कार्यालय फिर से सिर्फ सरकारी कामकाज के लिए जाना जाए, “बंदर बाबू की अदालत” के लिए नहीं.
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